छत्तीसगढ़

किसान आंदोलन को कमजोर करने के लिए अंग्रेज़ों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपना रही है मोदी सरकार : संजीव अग्रवाल

संजीव अग्रवाल ने कहा कि मोदी सरकार में नरेंद्र मोदी और अमित शाह मिलकर एन केन प्रकारेण सत्ता हथियाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं

रायपुर : आरटीआई कार्यकर्ता और काँग्रेस के नेता संजीव अग्रवाल ने मौजूदा किसान आंदोलन और गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में हुए हंगामे पर मीडिया के माध्यम से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा है कि भारत से अँग्रेज़ तो चले गए लेकिन उनकी नीतियाँ आज भी मोदी सरकार भारत वासियों पर अपना रही है और उसका कारण है, सत्ता!

संजीव अग्रवाल ने कहा कि मोदी सरकार में नरेंद्र मोदी और अमित शाह मिलकर एन केन प्रकारेण सत्ता हथियाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं जिस का उदाहरण पिछले 6 साल में भारत कई बार देख चुका है। 3 महीने से चल रहे किसान आंदोलन के सामने जब मोदी सरकार के कृषि मंत्री बुरी तरह से विफल हो गए और उन्हें पीछे हटना पड़ा तो इसकी चिढ़ और खीझ के कारण मोदी सरकार ने कल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर किसान आंदोलन में फूट डालकर उसे कमजोर करने के लिए किसानों पर आँसू गैस के गोले छोड़कर लाठी-चार्ज किया।

लाल किले की प्राचीर पर झंडा

साथ ही अपने ही कुछ लोगों को लाल किले की प्राचीर पर झंडा लगाने के लिए किसानों के एक धड़े को उकसाने को भेज दिया। सोचने वाली बात है कि मोदी सरकार अगर चाहती तो लाल किले पर किसानों को पहुंचने से रोक सकती थी। वाटर कैनन का इस्तेमाल कर सकती थी, बल प्रयोग कर सकती थी, लाल किले को छावनी में तब्दील कर सकती थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। उल्टा किसानों के एक धड़े को जिसमें मोदी सरकार के ही प्रायोजित लोग थे, उन्हें जाने का रास्ता दिया गया ताकि किसान आंदोलन को बदनाम किया जा सके और अपनी खरीदी हुई मीडिया के माध्यम से इस आंदोलन को बदनाम करने की भरसक कोशिश की जा सके और ऐसा हुआ भी।

संजीव अग्रवाल ने कहा ठीक गणतंत्र दिवस के दिन जब देश में विदेशी मेहमान आते हैं ऐसी स्थिति में अगर कानून व्यवस्था का यह हाल है कि देश की राजधानी दहशत में पड़ जाती है, कर्फ्यू लगाना पड़ जाता है, इंटरनेट की सुविधाएँ बंद करनी पड़ जाती हैं तो इसका जिम्मेदार कौन है? यकीनन इसका जिम्मेदार देश के गृह मंत्री ही हैं।

किसान आंदोलन से मोदी सरकार की छवि खराब होने के बाद किसान आंदोलन को कमजोर करने की ये एक सोची समझी साज़िश थी क्योंकि तमाम वायरल वीडियोज़ में देखा जा सकता है कि पुलिस लाल किला के क्षेत्र में कुछ नहीं कर रही थी। ऐसा तब होता है जब पुलिस पर ऊपर से दबाव होता है। इसीलिए मैं मांग करता हूं कि इस घटना की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए देश के गृह-मंत्री अमित शाह को तुरंत इस्तीफ़ा दे देना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इस घटना की एक उच्चस्तरीय जांच करवानी चाहिए तथा दोषियों को कठोरतम सजा दी जानी चाहिए।

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