टेक्नोलॉजी

मोदी सरकार ने दी स्वदेशी निर्मित सिस्टम की छह स्क्वाड्रन को स्वीकृति

आकाश मिसाइल की स्क्वाड्रन को पाकिस्तान और चीन के बॉर्डर इलाके में किया जाएगा तैनात

नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार द्वारा स्वदेशी निर्मित आकाश मिसाइल सिस्टम की छह स्क्वाड्रन को भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल करने की स्वीकृति मिल चुकी है, जिसके मद्देनजर अब आकाश मिसाइल की स्क्वाड्रन को पाकिस्तान और चीन के बॉर्डर इलाके में तैनात किया जाएगा.

बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी ने हाल ही में वायुसेना के लिए इस परियोजना को सहमति प्रदान की थी. रक्षा मंत्रालय ने सरकार के इस निर्णय की जानकारी वायुसेना को गुरुवार को दी.

सूत्रों ने बताया कि इस मिसाइल सिस्टम की खरीद के लिए तीन साल पहले प्रस्ताव दिया गया था. इस मंजूरी के साथ ही वायुसेना के पास आकाश मिसाइल सिस्टम की संख्या 15 हो जाएगी.

पिछले साल इजराइल के साथ सूर्य लंका युद्धाभ्यास के दौरान आकाश डिफेंस सिस्टम को बेहतर प्रदर्शन वाला सिस्टम बताया गया था. 27 फरवरी को बालाकोट स्ट्राइक के मद्देनजर भी इस मिसाइल तकनीक की जरूरत महसूस की गई थी. इसके बाद इस प्रस्ताव को सहमति प्रदान कर दी गई.

आकाश मिसाइल की खूबी

25 किलोमीटर तक प्रहार करने और 60 किलोग्राम आयुध (वारहैड) लेकर जाने की क्षमता वाली मिसाइल का परीक्षण प्रक्षेपण आईटीआर के प्रक्षेपण परिसर-3 से पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न दो बजे तक किया गया.

परीक्षण के दौरान पैरा-बैरल लक्ष्य पर निशाना साधने वाली आकाश मिसाइल ‘रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन’ (इसरो) द्वारा विकसित मध्यम स्तर की जमीन से हवा में प्रहार करने वाली विमान रोधी रक्षा प्रणाली है. एकीकृत निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम के तहत इसे विकसित किया गया है. आकाश रामजेट-रॉकेट संचालन प्रणाली से चालित है.

यह मिसाइल 2.8 से 3.5 मैक की सुपरसोनिक गति से उड़ान भर सकती है और करीब 25 किलोमीटर तक की दूरी के हवाई लक्ष्यों को भेद सकती है. वायु सेना में औपचारिक रूप से जुलाई 2015 में इस मिसाइल को शामिल किया गया था.

अमेरिकी एमआईएम-104 पैट्रियट मिसाइल की तुलना में आकाश में लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और हवा से सतह पर प्रहार करने वाली मिसाइलों को भेदकर गिराने की क्षमता है.

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