मोदी सरकार पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम करने के मूड में नहीं ,लगातार बढ़ रहे हैं पेट्रोलियम के दाम

वित्तीय घाटे के प्रबंधन में लक्ष्य से पिछड़ रही मोदी सरकार पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम करने के मूड में नहीं है. लेकिन विपक्ष के दबाव और जनता में नाराजगी को देखते हुए सरकार कोई और रास्ता निकालने की कोशिश कर रही है. इसके लिए कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाली सार्वजनिक कंपनी ओएनजीसी से कहा जा सकता है कि वह कुछ बोझ उठाए. यह योजना कारगर रही तो पेट्रोल-डीजल के दाम में 2 रुपये प्रति लीटर तक की कमी आ सकती है.

सस्ता तेल देने का हो सकता है आदेश

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार पेट्रोलियम मंत्रालय सार्वजनिक कंपनी ऑयल ऐंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) से यह कह सकता है कि वह बढ़े दाम का कुछ बोझ सहे और रियायती दाम पर कच्चे तेल की आपूर्ति करे. अखबार से बातचीत में एक सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘मंत्रालय ओएनजीसी को यह निर्देश देगा कि वह कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय कीमत से कम पर बेचे. पूरे साल के लिए कीमत 70 बैरल प्रति डॉलर तक ही रखने को कहा जा सकता है.’

गौरतलब है कि ओएनजीसी कच्चे तेल का आयात कर देश में तेल रिफाइन और मार्केटिंग कंपनियों को इसकी आपूर्ति करती है. ओएनजीसी के अलावा ऑयल इंडिया लिमिटेड भी कच्चा तेल बेचती है, लेकिन फिलहाल उसे बख्शा जा रहा है. आईओसी, एचपीसीएल और बीपीसीएल जैसी तेल रिफाइनिंग-मार्केटिंग कंपनियों की जरूरतों के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल की आपूर्ति ही ओएनजीसी करती है. लेकिन जून 2015 तक तेल पर सालाना सब्सिडी बिल का 40 फीसदी हिस्सा ओएनजीसी और ऑयल इंडिया का था.

डीलर्स की मार्जिन पर भी चल सकती है कैंची

ओएनजीसी ने अगर सरकार की योजना के मुताबिक काम किया तो तेल के दाम में जितनी बढ़त की जरूरत है, वह घटकर एक तिहाई हो सकती है. इसके अलावा सरकार डीलर्स के कमीशन में भी डीजल पर 18 पैसे प्रति लीटर और पेट्रोल पर 23 पैसे प्रति लीटर की कटौती कर सकती है. इससे ओएनजीसी पर करीब 30,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है, लेकिन पेट्रोल-डीजल के दाम में दो रुपये प्रति लीटर तक की कटौती हो सकती है. सूत्र का कहना है कि इस विचार को तो सैद्धांतिक तौर पर स्वीकार कर लिया गया है, लेकिन इसका तरीका क्या हो और कितना बोझ डाला जाए, इस पर अभी काम होना है.

केंद्र सरकार के तमाम मंत्री लगातार यह कहते रहे हैं कि तेल पर टैक्स में कटौती नहीं की जा सकती, क्योंकि इस पैसे से विकास के तमाम काम होते हैं. इसलिए अब दूसरे विकल्प अपनाने पर विचार किया जा रहा है.

कर्नाटक चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जो बढ़त शुरू हुई थी, उस पर अभी ब्रेक नहीं लगा है. पिछले करीब एक हफ्ते से लगातार इसमें बढ़ोतरी हो रही है.

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