मोदी जी शपथ ग्रहण समारोह: आयु दुर्घटना का ध्यान रखें, घट सकती है भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना

30 मई 2019 को मोदी जी सायं काल 19:00 बजे, दिल्ली शपथ ग्रहण

मोदी जी प्रधानमंत्री पद को दूसरी बार सुशोभित करने जा रहे हैं। 30 मई 2019 को मोदी जी सायं काल 19:00 बजे, दिल्ली शपथ ग्रहण कर रहे है। 2014 से 2019 तक के अपने पिछले कार्यकाल में मोदी जी ने सबका मन जीत लिया और इसका परिणाम यह रहा कि आज वो एक बहुत बड़े बहुमत के साथ अपनी सरकार बना रहे है।

सिर्फ मोदी जी को रिकार्ड बहुमत पाने का एकमात्र श्रेय

यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि रिकार्ड बहुमत पाने का एकमात्र श्रेय यहां सिर्फ और सिर्फ मोदी जी को जाता है। मोदी जी के पूर्व कार्यकाल को काफी हद तक सफल कहा जा सकता है, यदि कुछ एक-विषयों को छोड़ दिया जाए तो। अपनी इस दूसरी पारी में मोदी जी क्या कुछ कर पायेंगे और क्या एक बार फिर से मोदी जी जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतर पायेंगे?

कैसे रहेंगे आने वाले पांच साल?

कुछ ऐसे प्रश्न आज हर भारतीय के जहन में है। आने वाले पांच सालों में मोदी जी किस प्रकार का कार्य करने वाले है और कैसे रहेंगे आने वाले पांच साल? आज इसका विश्लेषण हम 30 मई 2019,19:00,दिल्ली (शपथ ग्रहण समारोह) के समय की कुंडली बनाकर कर रहे हैं- आईये देखते हैं कि शपथ ग्रहण समारोह के समय की कुंडली इस विषय में क्या कहती है-

मोदी जी और शपथ ग्रहण समारोह दोनों ही कुंडलियों का लग्न एक समान

शपथ ग्रहण समारोह के समय वॄश्चिक लग्न उदित हो रहा है। इस समय चंद्र मीन राशि में गोचर कर रहा है। मोदी जी और शपथ ग्रहण समारोह दोनों ही कुंडलियों का लग्न एक समान है। शपथ ग्रहण समारोह का चयन निश्चित रुप से ज्योतिषियों के द्वारा किया गया है, क्योंकि ग्रह स्थिति इसी ओर संकेत कर रही है।

लग्न भाव में पंचमेश गुरु वक्री अवस्था में है। द्वितीय भाव में शनि और केतु, पंचम में चंद्र, विरोधी भाव में शुक्र, सप्तम में बुध और सूर्य, अष्टम में राहु और मंगल ग्रह की युति है। सबसे पहले एकादश भाव और एकादशेश की स्थिति देखते है।

एकादश भाव पर पराक्रमेश और चतुर्थेश वक्री शनि की दशम दृष्टि, भाग्येश चंद्र की सप्तम और लग्नेश मंगल की चतुर्थ दृष्टि है। इस प्रकार एकादश भाव एक अशुभ और दो शुभ दृष्टियों के प्रभाव में होने के कारण मध्यम शुभ है। एकादशेश बुध दशम से दशम भाव अर्थात सप्तम में दशमेश के साथ है, यह युति अति शुभ और उन्नतिकारक है।

पाप ग्रहों का प्रभाव अधिक

एकादश से चतुर्थ भाव अर्थात द्वितीय भाव जिसे सत्ता पद का भाव कहा जाता है इस भाव पर पाप ग्रहों का प्रभाव अधिक है। शनि-केतु की युति, राहु-मंगल की दृष्टि इस भाव को दूषित कर रही है, शनि तीसरे भाव का स्वामी होकर द्वितीय में है, यह पडौसी देशों की वजह से अशांति दर्शा रहा है। कश्मीर मुद्दा इस वजह से तूल पकड़ कर गॄहशांति भंग करेगा।

कश्मीर से जुड़ी धाराओं को हटाने और कानून में परिवर्तन के विषय इस आग में घी का काम करेंगे, राहु-म्ंगल का यहां प्रभाव दंगे और विस्फोटक स्थिति का सूचक है। इस समय राहु गुरु के पुनर्वसु नक्षत्र में है और गुरु लग्न भाव में है इसलिए नीतिकुशलता इसमें विशेष भूमिका निभा रही है। सूर्य सत्ता कारक ग्रह है। और द्वितीय भाव के स्वामी का अपने से द्वादश में स्थित होना, पांच साल से पूर्व अप्रत्याशित घटना के चलते दोबारा चुनाव की स्थिति को दर्शा रहा है।

सूर्य ग्रह से प्रधानमंत्री की स्थिति और आयु का विचार किया जाता है, उस पर वर्की ग्रह का प्रभाव भविष्य में अशुभ घटना का संकेत दे रहा है। अष्टम से अष्टम भाव अर्थात तीसरे भाव और भावेश पर मंगल व अन्य अशुभ ग्रहों का प्रभाव आयु दोष का सूचक है।

शनि-केतु व राहु-मंगल का अक्ष मोदी जी को आयु दुर्घट्नाओं के प्रति सावधानी बरतने का संकेत दे रहा है।2022 से 2025 के मध्य स्थिति सावधान रहने की है। सुरक्षा नियमों में चूक एक बड़ी दुर्घटना का कारण बन बड़ी राज हानि का संकेत दे रही है।

आचार्य रेखा कल्पदेव, ज्योतिष सलाहकार : 8178677715

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