राष्ट्रीय

जेपी और नानाजी देशमुख को मोदी ने दी श्रद्धांजलि, बताया प्रेरणा स्रोत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि लोकनायक जय प्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख जैसे नेता युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत है. जिन्होंने अपना जीवन देश के नाम समर्पित कर दिया लेकिन राजनीतिक पदों से हमेशा दूर रहे.

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ी जंग
जयप्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख को उनकी जयंती पर याद करते हुए मोदी ने कहा कि जब भ्रष्टाचार के खिलाफ जयप्रकाश जंग लड़ रहे थे तो दिल्ली की सल्तनत में खलबली मच गई थी. लोकनायक को रोकने के लिए षड्यंत्र होते थे. पटना के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में जेपी पर हमला हुआ. उनके बगल में नानाजी देशमुख खड़े थे. नानाजी ने अपने हाथों पर मृत्यु के रूप में आए प्रहार को झेल लिया.हाथ की हड्डियां टूट गई. वो ऐसी घटना थी कि देश का ध्यान नानाजी देशमुख की तरफ गया.’
देश के संकल्प के लिए खुद का झोका

उन्होंने कहा कि इन दोनों महापुरुषों ने अपने जीवनकाल में देश के संकल्प के लिए खुद को सौंप दिया. इन दोनों के जीवन का पल-पल मातृभूमि के लिए, देशवासियों के कल्याण के लिए था और आजीवन इसमें जुटे रहे.1942 में भारत छोड़ो आंदोलन तीव्रता पर पहुंचा ऐसे समय में जयप्रकाश जी, लोहिया जी जैसे युवाओं ने आगे आकर आंदोलन की डोर संभाली. उस कालखंड में वे लोगों की प्रेरणा का स्रोत बन गए.’

सत्ता को रखा खुद से दूर
जेपी और नानाजी देशमुख के सामाजिक जीवन से जुड़े कार्यों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा,’ ‘आजादी के बाद सत्ता के गलियारों में लोग जगह ढूंढ़ते थे, जयप्रकाश जी ने सत्ता से खुद को दूर रखा. उन्होंने और उनकी पत्नी प्रभादेवी ने ग्रामोत्थान के मार्ग को चुना.’

उन्होंने कहा कि नानाजी देशमुख को देश ज्यादा जानता नहीं था.संसाधनों को ग्राम विकास के काम में लगाया. नानाजी देशमुख को मंत्री पद के लिए मोराराजी की सरकार में आमंत्रित किया गया, लेकिन उन्होंने विनम्रतापूर्वक इनकार कर दिया.’ प्रधानमंत्री मोदी ने नानाजी को ग्राम सेवा में लगे रहने वाला कार्यकर्ता बताया.
महापुरुषों के सपनों के आधार पर उस दिशा में आगे बढ़ेगी

उन्होंने कहा कि नानाजी देशमुख ने स्वयं को राजनीतिक जीवन से निवृत कर करीब साढे 3 दशक तक चित्रकूट को केंद्र बनाकर अपने जीवन को ग्रामीण विकास के लिए झोक दिया. भारत सरकार इन महापुरुषों के सपनों के आधार पर उस दिशा में आगे बढ़ रही है. गांव आगे कैसे बढ़ें, गरीबी से मुक्त कैसे बनें, बीमारी से मुक्त कैसे बनें, जातिवाद से मुक्त हो उस दिशा में प्रयास कर रहे हैं.’

Summary
Review Date
Reviewed Item
नानाजी देशमुख
Author Rating
51star1star1star1star1star
Tags

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.