गौ रक्षा के नाम पर हिंसा नही होनी चाहिए : मोहन भागवत

विजय दशमी के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने आरएसएस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि रोहिंग्या अपने ही देश के लिए खतरा हैं तो हमारे देश में खतरे की चिंता क्यों नहीं चाहिए. संघ प्रमुख ने सवाल किया कि रोहिंग्या यहां क्यों हैं? उन्हें अपना देश क्यों छोड़ना पड़ा. म्यांमार ने रोहिंग्या पर कड़ा कदम उठाया है. अगर उन्हें कहीं भी शरण दी जाती है, चाहे वह मानवता के आधार पर हो या सुरक्षा के आधार पर यह अच्छा नहीं होगा. उन्होंने कहा कि अगर रोहिंग्या को इस देश में रहने की अनुमति दी जाती है, तो वे हमारे देश के लिए खतरा बन जाएंगे.

‘गौरक्षा को हिंसा से जोड़ना ठीक नहीं’

गौरक्षा के मुद्दे पर भागवत ने कहा कि इसे हिंसा से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. मुस्लिम भी गौ रक्षक हैं और उन पर भी हमले हुए हैं. गौ रक्षा के नाम पर हिंसा नहीं होनी चाहिए. रक्षा और सतर्कता शब्द का कुछ लोगों ने दुरुपयोग किया है.

गौ तस्करों द्वारा मारे जा रहे लोग

उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हैं कि बहुत सारे लोग गौ तस्करों द्वारा मारे जा रहे हैं. हमें धर्म से परे हटकर गौ रक्षा के मुद्दे को देखना चाहिए. बहुत सारे मुस्लिमों ने गौ रक्षा के लिए अपनी जान दी है. गाय की रक्षा बजरंग दल के लोगों की तरह होनी चाहिए. छोटे किसानों की खुशहाली के लिए गाय बहुत जरूरी है. संविधान में भी गाय की रक्षा और गाय आधारित कृषि का उल्लेख है.

मोहन भागवत ने कहा कि केरल और बंगाल में वहां क्या हो रहा है सबको पता है. जिहादी ताकतें वहां सक्रिय हैं. लोग विरोध कर रहे हैं और राज्य सरकारें अपना दायित्व नहीं निभा रही हैं.

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