छत्तीसगढ़

संयम और मजबूती सा विराट व्यक्तित्व के मोहन मरकाम – संदीप दुबे

मोहन मरकाम एक मजबूत व्यक्तित्व- जन्मदिन पर विशेष

कोंडागांव: कोंडागांव के टेंडमुंडा गांव में 15 सितम्बर 1967 को जन्म हुआ। इनके पिता का नाम स्व. भीखराय मरकाम जिनके आय का मुख्य साधन कृषि था । 7 भाई व 2 बहनों में मरकाम जी 5 वीं सन्तान थे ।हाई स्कूल व हायर सेकेण्डरी माकड़ी व काॅलेज की पढ़ाई कांकेर महाविद्यालय से भूगोल विषय से एमए किया।

इस दौरान एनसीसी से गणतंत्र दिवस परेड में भाग लिया। छात्रसंघ अध्यक्ष रहे। विभिन्न सामाजिक संगठनों में काम किया। इनकी रूचि कानून की पढाई में भी रही इसके लिए इन्होंने जगदलपुर में रहकर 2 वर्षों तक कानून की पढाई की । इस बीच शासकीय नौकरी मिलने से कानून की पढ़ाई बीच में ही छुट गई । इन्होने शिक्षाकर्मी आैर एलआर्इसी में विकास अधिकारी की नौकरी की।
1990-91 में शहीद महेन्द्र कर्मा जी के सानिध्य में कांग्रेस पार्टी से जुड़े। विधानसभा चुनाव 2008 में कांग्रेस पार्टी ने पहली बार मोहन मरकाम को अपना प्रत्याशी बनाया और भाजपा प्रत्याशी व छत्तीसगढ़ शासन में मंत्री (सुश्री लता उसेण्डी) से उनका सीधा मुकाबला रहा जिसमें उन्हे 2771 मतों से हार का सामना करना पड़ा ।

2013 में कांग्रेस ने मोहन मरकाम को फिर से टिकट दिया और इस बार उन्होंने भाजपा प्रत्याशी व छत्तीसगढ़ शासन में मंत्री रही लता उसेंडी को शिकस्त दे दी । 2018 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस की कोंडागांव सीट से लड़ते हुए फिर से भाजपा प्रत्याशी को हराया और लगातार दूसरी बार विधायक बने ।

प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बनने से पूर्व पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने कोंडागांव विधायक मोहन मरकाम और भानुप्रतापपुर विधायक मनोज मंडावी को अपने आवास पर मुलाकात के लिए बुलाया था। प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया दोनों को लेकर राहुल गांधी के घर पहुंचे थे। वहां राहुल ने मोहन मरकाम और मनोज मंडावी से अलग-अलग मुलाकात की थी।

करीब 20-20 मिनट की इन मुलाकातों के दौरान पीएल पुनिया भी मौजूद रहे। मोहन मरकाम ने इसे औपचारिक मुलाकात बताया था। राहुल मिनट गांधी ने इस मुलाकात में दोनों विधायकों से उनकी सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि की जानकारी ली थी । उनसे पूछा था कि वे कब से विधायक हैं, विधानसभा और उसके बाहर जनता के मसलों पर उनकी सक्रियता कैसी है।

उन्होंने राहुल गांधी जी को बहुत संयम से जवाब देकर अपनी राजनैतिक दृष्टिकोण बताई ,उनका दृष्टि बहुत साफ था ,मरकाम जी ने बूथ स्तर के कर्ताओ को ट्रेनिंग देने और मजबूत करने पर ध्यान देने की बात कही ,बस फिर क्या था ,राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल जी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया ,उनके अध्यक्षीय कार्यकाल में 2 उपचुनाव हुए उसमें उनका बूत स्तर तक संगठन को मजबूत कर चुनाव लड़ा गया और जीत हासिल हुई ,उसके पश्चात नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में बड़ी सफलता हासिल की है ,उनका सरल व्यक्तित्व और सुझभुझ ही बूत स्तर तक के कार्यकर्ताओं से सीधे संपर्क साढ़े रखे हुए है ,अभी उनके नेतृत्व में मरवाही चुनाव भी लड़ जाने वाला है ,जहा वो लगातार दौरा और सतत निगरानी करके कार्यकर्ताओ को चार्ज करने का काम कर रहे है ,वो प्रदेश के पहले ऐसे नेता है जो लगातार पदयात्रा करके कार्यकर्ताओ में उत्साह का संचार किया है ,उन्होंने गांधी जी के 150 वी वर्षगांठ पर कंडेल से रायपुर तक लगातार पदयात्रा कर महात्मा गांधी के जीवन दर्शन को आम जन तक पहुचाया .

कल उन्होंने अपना 52 वा जन्मदिन इस भयंकर कोरोना काल में मृतकों श्रधांजलि के लिए अर्पण करने का निर्णय लेकर जन्मदिन नही मनाने निर्णय लिया है । उन्होंने कार्यकर्ताओ को संदेश दिया है कि आप सब कोरोना संक्रमित लीगो की सहायता करे ,यही सेवा उनके जन्मदिन का उपहार होगा, फिर से कहना चाहूंगा कि मोहन जी मन को मोहने वाले मजबूत इरादे के नेता है,उनके नेतृत्व में कांग्रेस नई ऊंचाई पर पहुचेगी।( लेखक संदीप दुबे अधिवक्ता उच्च न्यायालय एवं अध्यक्ष प्रदेश कांग्रेस कमेटी विधि विभाग है )

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