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RBI के लिए कर्ज सस्‍ता करना मुश्किल, ये हैं चार चैलेंज

आज से शुरू होने वाली दो दिवसीय रिजर्व बैंक की मॉनीटरी पॉलिसी समीक्षा बैठक में रिजर्व बैंक के लिए कर्ज सस्‍ता करना बहुत मुश्किल है। यानी रिजर्व बैंक के लिए रेट में कटौती की गुंजाइश कम है। एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि रिजर्व बैंक के सामने महंगाई बढ़ने, विदेशी निवेशकों द्वारा शेयर बाजर से पैसा निकालने, अमेरिका की अर्थव्‍यवस्‍था में सुधार और कच्‍चे तेल की कीमतों में इजाफा होने जैसी चुनौतियां हैं।

इसकी वजह से मॉनीटरी पॉलिसी समीक्षा बैठक में रेट कट की संभावना बहुत कम है। हालांकि एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि रिजर्व बैंक पर ग्रोथ, महंगाई और पूंजी के प्रवाह के बीच संतुलन बनाने का दबाव रहेगा।

महंगाई की चुनौती

एचडीएफसी बैंक के चीफ इकोनॉमिस्‍ट अभीक बरुआ ने बताया कि पिछले कुछ समय में महंगाई बढ़ रही है। इसके लिए कुछ हद तब बेस इफेक्‍ट भी जिम्‍मेदार है। इसके अलावा फूड प्राइसेस की कीमतें खास कर टमाटर और प्‍याज की कीमतों में वृदिध को कुछ समय के लिए बताया जा रहा था लेकिन अभी टमाटर और प्‍याज की कीमतों में कुछ खास गिरावट नहीं आई है। ऐसे में रिजर्व बैंक के सामने महंगाई बढ़ने का जोखिम है।

विदेशी निवेशक शेयर बाजार से निकाल रहे पैसा
अभीक बरुआ के मुताबिक पिछले कुछ समय में कैपिटल फ्लाइट का दौर चला है। यानी विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार से तेजी से पैसा निकाला है। बाजार में बड़े पैमाने पर विदेशी पूजी शार्ट टर्म डेट के रूप में है। यह पूंजी रेट सेंसेटिव होती है। अगर रिजर्व बैंक रेट कट करता है तो विदेशी पूंजी के वापस जाने का खतरा बढ़़ता है। ऐसे में रिजर्व बैंक को इस पर गौर करना होगा।

वैश्विक स्थिति उभरते बाजारों के पक्ष में नहीं
अभीक बरुआ का कहना है कि वैश्विक स्थिति उभरते बाजारों खास कर भारत के पक्ष में उतना नहीं है जितना 4 महीने पहले थी। अमेरिका की अर्थव्‍यवस्‍था थोड़ा बेहतर हुई है। राजनीतिक मोर्चे पर भी अनिश्चितत थोड़ा कम हुई है। अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कई मसलों पर डेमोक्रेट के साथ बातचीत की पहल की है। पहले लगता था कि अमेरिका का फेडरल बैंक रेट कट नहीं करेगा लेकिन अब स्थितियों में बदलाव आया है। ऐसे में अमेरिका में दिक्‍कतें कम होने पर पूंजी वापस जाने का खतरा है।

कच्‍चे तेल की कीमतों में इजाफा
इसके अलावा पिछले कुछ समय से अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्‍चे तेल की कीमतों में इजाफा हो रहा है। आने वाले समय में भी यह ट्रेड जारी रह सकता है। कच्‍चे तेल की कीमतें बढ़ाने का असर महंगाई पर पड़ता है। ऐसे में रिजर्व बैंक को कच्‍चे तेल की बढ़ती कीमतों पर भी गौर करना होगा।

रेट कट के लिए गुंजाइश नहीं
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्‍ट डीके जोशी का कहना है रेट कट के लिए रिजर्व बैंक के पास गुंजाइश नहीं है। मॉनीटरी पॉलिसी बैठक में रिजर्व बैंक ग्रोथ के अनुमान को जरूरत कम कर सकता है। रिजर्व बैंक ने ग्रोथ का अनुमान 7.3 फीसदी तय किया था। लेकिन मौजूदा स्थि‍ति में यह संभव नहीं लगता है।

मार्च से पहले रेट में हो सकती है कटौती
अभीक बरुआ का कहना है कि आगामी मानीटरी पॉलिसी मीट में रेट कट होने की गुंजाइश कम है लेकिन रिजर्व बैंक महंगाई और ग्रोथ के डाटा देखने के बाद मार्च 2018 से पहले एक बार रेपो रेट में एक कटौती जरूर कर सकता है। ग्रोथ को सपोर्ट में रिजर्व बैंक का भी एक रोल है। रिजर्व बैंक भी ग्रोथ में सुस्‍ती पर ध्‍यान देगा।

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