छत्तीसगढ़

मासिक धर्म प्रकृति का उपहार- कृष्णा बघेल

आगर संगोष्ठी में महिला जागृति शिविर व परिचर्चा का हुआ आयोजन

– मनीष शर्मा

मुंगेली: महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के अवसर पर कलेक्टोरेट स्थित आगर संगोष्ठी कक्ष में महिला जागृति शिविर एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिला पंचायत अध्यक्ष कृष्णा बघेल ने कहा कि मासिक धर्म/माहवारी प्रकृति का उपहार है इस संबंध में मां बहन बालिकाओं को खुलकर बतायें। स्वच्छता पर भी ध्यान रखें।

उन्होने कहा कि पहली बार काफी संख्या में महिलायें उपस्थित हुई है। मासिक धर्म के बारे में सभी महिलाएं विदित है। बेटी एक दिन नारी बनती है आज की बेटियां जानकार है क्योंकि मोबाईल फेसबुक के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर लेते है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी लोकेश चंद्राकर ने कहा कि आज ऐसे विषय पर परिचर्चा हो रही है जो अनछूआ रहा है समाज में परिवर्तन आ रहा है।

उन्होने कहा कि बालिकाओं में संवादहीनता की स्थिति न रहे। मासिक धर्म के संबंध में खुलकर चर्चा होनी चाहिए। इसमें पुरूषों की भागीदारी भी आवश्यक है। नगर पालिका अध्यक्ष सावित्री सोनी ने कहा कि मासिक धर्म के प्रति महिलाओं में जागरूकता आवश्यक है। माहवारी होने से खून की कमी हो जाती है इसलिए आयरन लेने की सलाह देना चाहिए।

मितानीन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लड़कियों को सही जानकारी दें। मायारानी सिंह ने कहा कि मासिक धर्म में मां बहन की भूमिका काम आती है। माहवारी से डरने की आवश्यकता नहीं है। जिला पंचायत सदस्य उर्मिला यादव ने भी संबोधित किया। जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेंद्र कश्यप ने विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन एवं परिचर्चा के संबंध में जानकारी दी।

महिला जागृति शिविर एवं परिचर्चा में मासिक धर्म के प्रमुख बातों अनियमित माहवारी, मासिक धर्म महिलाओं के लिए ऐसा समय होता है जब वह थकान व सुस्ती का अनुभव करती है। इस पीरियड में क्रैंप, खराब सेहत और मतली आम बात है। मासिक धर्म के दौरान शरीर से बड़ी मात्रा में खून निकलता है इसलिए आयरन से भरपूर भोजन से खून की कमी को दूर करने के साथ-साथ हिमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाती है।

पौष्टिक आहार लेने की आवश्यकता, आयरन से भरपूर आहार से खून कमी कमी को दूर करने के साथ-साथ हिमोग्लोबिन की मात्रा को भी बढ़ाती है। परिचर्चा में मासिक धर्म को लेकर भ्रांतियां दूर करने के बारे में बताया गया। भारत में आज भी महिलाएं मासिक धर्म को लेकर अनेक भ्रांतियां का शिकार है। खाना नहीं बनाती, जल स्त्रोंतों जल भण्डारण को हाथ नहीं लगाती, इस दौरान कई नियमों का पालन भी होता है।

मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता आवश्यक है। खण्ड चिकित्सा अधिकारी डॉ. एम.के. राय ने बताया कि पीड़ादायक माहवारी उनके उपचार जैसे उदर के नीचे भाग गर्म सेक करें। सेकने वाले पैड को रखे रखे सो मत जायें। गर्म जल से स्नान करें, गर्म पेय ही पीयें, थोड़े-थोड़े अंतराल पर भोजन करें, पीड़ादायक माहवारी लगातार तीन महिने में दर्द ठीक न हो या रक्त के बड़े-बड़े थक्के निकलते हो तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

माहवारी सामान्यतः शुरू होने के 5-11 दिन पहले शुरू हो जाते है। कार्यक्रम का संचालन विभा मसीह ने किया। रंगोली एवं नुक्कड़ नाटक के माध्यम से भी दी जानकारी- विश्व मासिक धर्म एवं स्वच्छता दिवस के अवसर पर आगर संगोष्ठी कक्ष में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से मासिक धर्म, पौष्टिक आहार, आयरन, मासिक धर्म को लेकर होने वाली भ्रांतियां, स्वच्छता माहवारी के लक्षण के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई।

इस मौके पर जिला शिक्षा अधिकारी जीपी भारद्वाज, पार्षद प्रमिला चौरसिया, उपसंचालक समाज कल्याण अरविंद सोनी सहित महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी, पर्यवेक्षक एवं कार्यकर्ता मौजूद थे।

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