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आकाशीय बिजली गिरने से होती हैं देश में सबसे ज्यादा मौतें, हर साल में 2447 मौतें…

नई दिल्ली : पिछले 24 घंटे में उत्तर प्रदेश में बिजली गिरने से 17 लोगों की मौत हो गई और 19 लोग घायल हो गए. आपको जानकर हैरानी होगी कि देश में किसी भी प्राकृतिक आपदा से ज्यादा मौतें बिजली गिरने से होती हैं. 2010 से लेकर 2018 तक 22,027 लोगों की मौत बिजली गिरने से हुई है. यानी हर साल औसत 2447 लोगों की जान बिजली गिरने से जा रही है.

क्लाइमेट रीजिलिएंट ऑब्जर्विंग सिस्टन प्रमोशन काउंसिल (CROPC) के चेयरमैन कर्नल संजय श्रीवास्तव ने बताया कि 2018 में ही 3000 से ज्यादा मौत बिजली गिरने से हुई है. पिछले तीन साल में ही बिजली गिरने से होने वाली मौतों की संख्या में 1000 का इजाफा हुआ है.

प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सरकारों और लोगों को जागरूक कर रहे कर्नल संजय श्रीवास्तव कहते हैं कि आज के दौर में बिजली गिरने से मौत होना शर्मनाक है. वह भी तब, जब 24 घंटे पहले चेतावनी जारी दी जाती है. उत्तर प्रदेश में 17 लोग मर गए और मुख्यमंत्री इसे दैवीय आपदा बताते हैं. जबकि, वैज्ञानिक तरीके से लोगों की जिंदगियां बचाई जा सकती हैं. लेकिन सरकारें ऐसा करती नहीं हैं.

कर्नल संजय श्रीवास्तव ने कहा कि जिस तरह से क्लाइमेट चेंज हो रहा है, उससे प्राकृतिक आपदाएं बढ़ गई हैं. पिछले साल आंध्र प्रदेश में मई महीने में एक दिन में 41,025 बार बिजली गिरी थी. इसकी वजह से 14 लोगों की मौत हो गई थी. वो तो आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन की चेतावनियों की वजह से सैकड़ों जानें बच गईं. आज के समय में तो राज्य सरकारें, आपदा प्रबंधन और मौसम विभाग 2 घंटे से लेकर 24 घंटे पहले तक चेतावनी जारी करती है. लेकिन इसके बावजूद कई राज्यों की सरकारें इसे लेकर गंभीर नहीं हैं.

जानिए…किस साल बिजली गिरने से हुई कितनी मौत

साल मृतकों की संख्या

2010 2622

2011 2550

2012 2263

2013 2833

2014 2582

2015 2641

2016 1479

2017 2057

2018 3000+

प्री-मॉनसून सीजन में ज्यादा गिरती है आसमानी बिजली

जून से सितंबर मॉनसून रहता है. लेकिन प्री-मानसून (अप्रैल से जून मध्य तक) ज्यादा आसमानी बिजली गिरती है. ये ज्यादा घातक होती हैं. यदि आसमान में अचानक कम ऊंचाई वाले घने काले और लटकते बादल दिखें, तो मान लें कि बारिश की पहली बूंद के बाद कभी भी और कहीं भी बिजली गिर सकती है.

बिजली चमकने और गड़गड़ाहट की आवाज के बीच का अंतराल 30 सेकेंड से भी कम होता है. अगर आपके सिर के बाल खड़े हो जाएं और आसमान में गहरे आसमानी रंग का घेरा दिखे, तो समझ लें कि तुरंत बिजली गिर सकती है.

जानिए कैसे मिलेगा सरकारी मुआवजा

बिजली गिरने से प्रभावित लोग मौत या नुकसान के लिए एफआईआर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट जरूर रखें. इनकी कॉपी अंचल अधिकारी या जिले के आपदा प्रबंधन अधिकारी को मुआवजे के लिए लिखित आवेदन के साथ दें.

कितना मुआवजा किस नुकसान पर

एक व्यक्ति की मौत पर उनके आश्रित को 4 लाख का मुआवजा.
प्रति घायल को 4300 से 2 लाख रु. तक (स्थिति अनुसार).
कच्चा या पक्का घर के पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने पर प्रति मकान 95,100 रु.
झोपड़ियों की क्षति पर प्रति झोपड़ी 2,100 रुपए.
दुधारू गाय, भैंस की मौत पर प्रति पशु 30 हजार रुपए.
बैल, भैंसा जैसे पशु की मौत पर प्रति पशु 25 हजार रुपए.
भेड़ व बकरी सहित अन्य की मौत पर प्रति पशु 3 हजार रुपए.

बिजली के हमले से बचने के लिए ये सावधानी जरूरी

1. बिजली गिरने के दौरान मजबूत छत वाला पक्का मकान सबसे सुरक्षित है.
2. घरों में तड़ित चालक लगवाएं.
3. घर में हैं, तो नल, फ्रिज, टेलीफोन आदि ना छुएं.
4. बिजली से चलने वाले उपकरण बंद कर दें.
5. यदि किसी वाहन पर सवार हैं तो तुरंत सुरक्षित जगह चले जाएं.
6. टेलीफोन, बिजली के पोल के अलावा टेलीफोन और टीवी टावर से दूर रहें.
7. कपड़ा सुखाने के लिए तार का प्रयोग ना कर जूट या सूत की रस्सी का उपयोग करें.
8. किसी इकलौते पेड़ के नीचे नहीं जाएं.
9. यदि जंगल में हैं, तो बौने (कम ऊंची पेड़) और घने पेड़ों के नीचे जाएं.
10. दलदल वाले स्थानों और जलस्रोतों से दूर रहने की कोशिश करें.
11. गीले खेतों में हल चलाने या रोपनी करने वाले किसान और मजदूर सूखे स्थानों पर जाएं.
12. ऊंचे पेड़ के तनों या टहनियों में तांबे का एक तार बांधकर जमीन में काफी गहराई तक दबा दें ताकि पेड़ सुरक्षित हो जाए.

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