श्रीविद्यामठ में दी गई स्वामी जयेन्द्र सरस्वती जी को भावभीनी श्रद्धांजलि

आज सायं 5 बजे श्रीविद्यामठ में कांची मठ के आचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती महाराज के ब्रह्मीभूत होने के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गयी। सभा की अध्यक्षता स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज ने की जिसमें काशी के संस्कृत जगत् के अनेक विद्वान् उपस्थित रहे ।

पूज्य स्वामिश्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि हम शंकराचार्य परम्परा के अनुयायी हैं और चार ही शंकराचार्य पीठ मानते है। इस दृढ सिद्धांत को मानने के बाद भी हमारे कांची मठ के स्वामी जयेन्द्र सरस्वती महाराज से मधुर सम्बन्ध थे । मतभेद होने के बाद भी मन भेद नही रहा । अनेक अवसरों पर उनसे भेंट हुई पर सदा ही उनके तपस्वी जीवन और गुणो ने हमें आकर्षित किया । उनके व्यक्तित्व की सरलता हम सभी के जीवन में आए यही हम चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि श्री राम जन्मभूमि के लिए उनके योगदान को नहीं भुलाया जा सकता पर वे अपने स्वभाव से इतने अधिक विनम्र थे कि लोगों ने उनके प्रयास को महत्व नहीं दिया । मनुष्य का कार्य प्रयास करना है पर सफलता तो ईश्वर ही देता है । उनको सफलता मिली या नहीं यह अलग बात है, पर उनके प्रयास में कोई कमी नही थी ।

सभा में अखिल भारतीय दण्डी संन्यासी महासभा के अध्यक्ष स्वामी विशुद्धानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज जब कांची पीठ के आचार्य का समाचार सुना तो टीवी में देखना चाहा तो देखा कि हर चैनल पर मुम्बई की एक अभिनेत्री का ही समाचार है और एक तपस्वी आचार्य जी का कोई समाचार नहीं था । यह घोर कलियुग है कि बहिर्मुख करने वालो का ही आज प्रचार है । सभी के जीवन में धर्म की भावना भरने वाले, जीवन को अन्तर्मुख बनाने वाले महान् तपस्वी आचार्य जी का कोई समाचार नही तो बहुत दुःख हुआ पर आज जब यह सूचना मिली कि श्रीविद्यामठ में स्वामी जी की श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जा रही है तो हमें बहुत प्रसन्नता हुई ।

सभा मे न्याय शास्त्र के विद्वान् आचार्य पं वशिष्ठ त्रिपाठी जी, वेदान्त शास्त्र के आचार्य पं रामकिशोर त्रिपाठी जी, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय मेंं संंस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के व्याकरण के प्रोफेसर आचार्य पं रामनारायण द्विवेदी जी, आचार्य पं बृजभूषण ओझा जी, पं शिवमूर्ति शर्मा जी, पं उमाकान्त जी, व्याकरणाचार्य ब्रह्मचारी दिव्य चैतन्य जी, आचार्य पं गिरीशदत्त जी, आर्य महिला हितकारिणी महापरिषद् के डा परमेश्वर दत्त शुक्ल जी, अधिवक्ता पं रमेश उपाध्याय जी, आई सी ए के संचालक श्री अभयशंकर तिवारी जी आदि ने अपने विचार व्यक्त किए ।

सभा का आरम्भ ब्रह्मीभूत जयेन्द्र सरस्वती जी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ । संचालन मयंकशेखर मिश्र ने तथा धन्यवाद ज्ञापन काशी विद्वत् परिषद् न्यास के अध्यक्ष डा श्रीप्रकाश मिश्र जी ने किया।

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