छत्तीसगढ़

आंगनवाड़ी केन्द्रों पर हुई गोदभराई की रस्म, स्वस्थ शिशु के लिए माँ का सुपोषित होना जरुरी

जिले के 1562 केन्द्रों पर हुआ कार्यक्रम

भभुआ: जिले के आंगनवाड़ी केन्द्रों पर मंगलवार को गोदभराई कार्यक्रम का आयोजन किया गया. सात से नौ महीने की गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की गयी. इस दौरान गर्भवती महिलाओं व बच्चों के देखभाल को लेकर कई जानकारी भी दी गयी.प्रचण्ड गर्मी के कारण 1 मई से सभी आंगनवाडी केंद्रों का समय प्रातः 7 बजे से 11 बजे दिन तक कर दिया गया है.

उत्सवी माहौल में की गयी गोदभराई: शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के केन्द्रो पर गर्भवती महिलओं को लाल चुनरी ओढा कर एवं माथे पर लाल टीका लगा कार्यक्रम की शुरुआत हुई. महिलओं को विभिन्न व्यंजनों में शामिल सतरंगी फल, सूखे मेवे भी भेंट की गयी. इस दौरान पोषक आहार में फल और मेवे का वितरण हुआ.

साथ ही गर्भावस्था के दौरान पोषक आहार सेवन के विषय में गर्भवतियों को भी जागरूक किया गया. सदर प्रखंड के चैनपुर पंचायत के आंगनवाड़ी संख्या 2 और 3 में गोदभराई की रस्म की गयी. प्रखंड की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी शशि कुमारी ने बताया कि गोदभराई का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था के आखिरी दिनों में बेहतर पोषण की जरूरत के विषय में गर्भवतियों को अवगत कराना है.

माता एवं गर्भस्थ शिशु के बेहतर स्वास्थ्य एवं प्रसव के दौरान होने वाली संभावित जटिलताओं में कमी लाने लाने के लिए गर्भवती के साथ परिवार के लोगों को भी अच्छे पोषण पर ध्यान देना चाहिए. बेहतर पोषण एक स्वस्थ बच्चे के जन्म में सहायक होने के साथ गर्भवती महिलाओं में मातृ मृत्यु दर में कमी भी लाता है.

आखिरी महीनों में जरुरी है बेहतर पोषण: गर्भ के आखिरी महीनों में शरीर को अधिक पोषक तत्वों की जरूरत होती है.इस दौरान आहार में प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट के साथ वसा की भी मात्रा होना जरुरी होता है. इसके लिए समेकित बाल विकास योजना के अंतर्गत आंगनवाडी केन्द्रों में गर्भवती महिलाओं को साप्ताहिक पुष्टाहार भी वितरित किया जाता है.

इसके साथ महिलाएं अपने घर में आसानी से उपलब्ध भोज्य पदार्थों के सेवन से भी अपने पोषण का ख्याल आसानी से रख सकती हैं. हरी साग-सब्जी, सतरंगी फल, दाल, सूखे मेवे एवं दूध के सेवन से आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति आसानी से की जा सकती है.

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