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छिंदवाड़ा: अस्पताल में चूहे ने दिया चकमा, नहीं मिल रही चूहे पकड़ने वाली एजेंसी

भोपाल: मध्य प्रदेश में छिंदवाड़ा के जिला अस्पताल को चूहे पकड़ने वाली एजेंसी नहीं मिल रही है. सोमवार को एनडीटीवी ने खबर दिखाई थी कि कैसे अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भर्ती शांतिराज के पैरों को चूहे ने काट डाला है. महिला के डायबिटीज से पीड़ित होने की वजह से घाव भरने में परेशानी हो रही है. दो महीने पहले एक और मरीज को इसी अस्पताल में चूहों ने काटा था. अस्पताल ने कई जगह चूहे पकड़ने के लिए जालियां लगाई हैं, लेकिन कामयाबी नहीं मिल रही. शांतिराज को 11 दिन आईसीयू में हो गए. वह डायबिटीज से पीड़ित हैं. चूहे के काटने से जख्म और गहरा हो गया है. शांतिराज ने कहा, यहां बहुत चूहे हैं, मैंने भी देखा है. जिस दिन उन्होंने मुझे काटा, तो समझ नहीं आया. झुनझुनी हो रही थी मेरी बेटी ने उन्हें देखा. अस्पताल में कई जगहों पर चूहे पकड़ने के लिए जाली लगाई गई है, लेकिन वो खाली पड़े हैं. अस्पताल कह रहा है कि उसे चूहे पकड़ने की एजेंसी नहीं मिल रही.

जिला अस्पताल में कार्यरत डॉ अजय मोहन वर्मा ने कहा कि चूहे नहीं आने चाहिए. कुछ दिनों पहले अस्पतालों के सर्वे में हमारे दो नंबर क्वॉलिटी कंट्रोल में कट गए. हम स्पष्ट बताते हैं हमने सारी एजेंसी पता कर ली लेकिन ज़िले में वो एजेंसी नहीं ढूंढ पाए जिसके मार्फत आधिकारिक मान्यता प्राप्त तरीके से उनसे चूहों से निजात पा सकें. सोमवार को छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में एक चूहा जाल में फंसा, लेकिन कर्मचारी जैसे ही उसे छोड़ने गये, चूहे ने उन्हें चकमा दे दिया. डॉ वर्मा ने मज़ाकिया अंदाज़ में इस मामले पर कहा, मैंने भी पेपर में पढ़ा कि वो आरएमओ को देखकर भाग गया.

वहीं, शांतिराज के मामले में कलेक्टर के आदेश के बाद जांच लगभग पूरी हो गई है. प्रशासन का कहना है दोषियों पर कार्रवाई होगी. जांच के अगुवा एसडीएम आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि आईसीयू में ऐसी घटना नहीं होनी चाहिये, घटना हुई है तो कोई ना कोई तो ज़िम्मेदार हैं जिसके ख़िलाफ निश्चित रूप से कार्रवाई होगी.

जिला अस्पताल में आईसीयू में भर्ती होने के लिए तीन दिन की फीस 100 रुपये है, 10 रुपये रजिस्ट्रेशन और भर्ती के लिए 50 रुपये अलग से. गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों के लिए इलाज के लिए पैसा नहीं देना पड़ता. अस्पताल में हर जगह गंदगी का अंबार है, मरीज़ों के शौचालय में भी साफ-सफाई नहीं है. अस्पताल में 400 बिस्तरों की क्षमता है, लेकिन मरीज आते हैं दोगुना. आदिवासी बहुल छिंदवाड़ा के इस जिला अस्पताल में सिवनी, बालाघाट, बैतूल के मरीज भी आते हैं. साल भर में तकरीबन 3 लाख मरीजों का यहां इलाज होता है. दो महीने पहले लकवे के इलाज के लिए आये एक शख्स के सिर को चूहों ने कुतर दिया था. ऐसे में मरीज और उनके तीमारदार डरे हुए हैं.

मध्य प्रदेश की लगभग 7 करोड़ की आबादी में 15,000 डॉक्टरों की जरूरत हैं, स्वीकृत पद इसके आधे यानी लगभग 7000 हैं, जबकि काम करने वालों की संख्या इसकी भी आधी है. ऐसे में आप सोच सकते हैं कि स्वास्थ्य का मुद्दा सरकारी प्राथमिकताओं में कहां है.

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छिंदवाड़ा अस्पताल में चूहे ने दिया चकमा, प्रबंधन को नहीं मिल रही चूहे पकड़ने वाली एजेंसी
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