कुत्तों की तरह काम कराते हैं टीवी वाले: सैफ

अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, सलमान खान, अक्षय कुमार जैसे बड़े-बड़े बॉलिवुड स्टार्स टीवी पर भी धमाल मचा रहे हैं, लेकिन छोटे पर्दे को लेकर सैफ अली खान के ख्यालात कुछ और ही हैं।

इन दिनों वेब सीरीज कर रहे सैफ टीवी पर काम नहीं करना चाहते, क्योंकि उनका मानना है कि छोटे पर्दे के मेकर्स की सोच भी छोटी होती है।

बकौल सैफ, ‘मुझे लगता है कि छोटे मीडियम से सोच भी छोटी हो जाती है, बजट भी छोटे हो जाते हैं और लोगों का एक-दूसरे को ट्रीट करने का ढंग भी छोटा हो जाता है।

जितना छोटा मीडियम है, उतनी छोटे ख्यालात भी हो जाते हैं। वे लोग कुत्तों की तरह काम कराते हैं और इंट्रेस्ट भी नहीं लेते। इसलिए इस देश में आदमी को स्टार ही होना चाहिए।

टीवी स्टार और फिल्म स्टार में बहुत फर्क है, क्योंकि प्रड्यूसर के ख्यालात में फर्क है। इसलिए मैं टीवी नहीं करना चाहता और ये छोटे स्क्रीन की वजह से नहीं है, छोटे आइडिया की वजह से है।’

वैसे, सैफ डिजिटल मीडियम को सिनेमाघरों पर खतरा नहीं मानते। उनका कहना है, नेटफ्लिक्स जैसे मीडियम से सिनेमा को खतरा नहीं है, क्योंकि लोग बाहर जाकर फिल्म देखना हमेशा पसंद करेंगे।

हमारे यहां फिल्म देखना एक इवेंट है, लेकिन फिल्ममेकर्स को भी वैसी फिल्म बनानी पड़ेगी कि लोग वहां तक आएं।

फिर ज्यादातर फिल्मों के लोगों को थिएटर तक न खींच पाने की वजह पूछने पर सैफ कहते हैं, ‘प्रॉब्लम यह है कि हमारे यहां कुछ ऑरिजनल, अच्छा और फ्रेश आइडिया ज्यादा सुनने का मिलता नहीं है।

मैं राइटर्स को नाराज नहीं करना चाहता, लेकिन इंडिया डिवेलप हो रहा है, ऑडियंस बदल रही है, लेकिन राइटिंग की क्वॉलिटी जैसे डिेवलप होनी चाहिए, वह नहीं हो पा रही है।

लोग राइटर नहीं बनना चाहते, क्योंकि पैसे नहीं हैं इसमें। अगर आप इब्राहिम से पूछो तो वह नहीं चाहेगा राइटर बनना। बोलेगा मुझे हीरो बनना है, क्योंकि मेन जॉब वही है।

ज्यादा होगा तो डायरेक्टर के लिए बोल सकता है। जब एक टॉपर लड़का, जो इंटेलिजेंट हो वह बोले कि मुझे राइटर बनना है। तब शायद अच्छी कहानियां सामने आएं।’

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