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Movie Review: देओल ब्रैंड के फैन, ज़रूर देखें यमला पगला दीवाना फिर से

फिल्म में वैद्य पूरन (सनी देओल) बहुत कम बोलते हैं, लेकिन कोई उनकी चुप्पी को तुड़वाने का प्रयास करता है

कहानी एक ऐसे वैद्य के किरदार के इर्द-गिर्द घूमती है जो अपनी असरकारी दवाओं की वजह से बड़ी-बड़ी दवाइयों की कंपनियों के आंख की किरकिरी बन गया है। कंपनियां उसे डरा-धमका रही हैं। उसके बरसों पुराने फ़ॉर्म्युले ‘वज्र कवच’ में हर बीमारी का इलाज है। पिंपल से लेकर नपुंसकता दूर करने से लेकर सबकुछ।

रिव्यू: फिल्म में वैद्य पूरन (सनी देओल) बहुत कम बोलते हैं, लेकिन कोई उनकी चुप्पी को तुड़वाने का प्रयास करता है तो वह उसको छोड़ते नहीं हैं। फिल्म में धर्मेंद्र ने जयंत नाम परमार नाम के शख्स का किरदार निभाया है तो बॉबी देओल ‘काला’ नाम के एक लड़के के रोल में हैं और सनी देओल वैद्य बने हैं।

पूरन की पूरे शहर में अच्छी खासी इज्जत है जबकि उसके भाई काला को कोई नहीं पसंद करता। काला 40 साल का अविवाहित युवक है जो कनैडा (कनाडा) जाने के सपने संजोए बैठा है। दूसरी ओर जयंत रंगीन मिजाज वकील हैं जो ख्वाबों में हसीनों का दीदार करते रहते हैं।

उनकी अपनी एक अलग ही दुनिया है। वह साइड ट्रॉली वाले स्कूटर की सवारी करते रहते हैं। कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि ‘यमला पगला दीवाना फिर से’ ने नई कहानी के साथ पॉप्युलर ब्रैंड को फिर से स्थापित करने का काम किया है। इस फिल्म ने देओल ब्रैंड को एक अंदाज में दर्शकों के सामने पेश किया है। फिल्म काफी हद तक दर्शकों को एक लाइट कमिडी डोज देने में सफल रही है।

धर्मेंद्र ने अपने फन पैक को बड़े ईजी वे में दर्शकों के सामने पेश किया है। सनी देओल की वही ढाई किलो के हाथ वाली इमेज इस बार दर्शकों को थोड़ा कॉमिक स्टाइल में देखने को मिली है। वहीं बॉबी देओल स्क्रीन पर सबसे अधिक समय के लिए दिखे जरूर हैं लेकिन कुछ नया कर पाने में खासे सफल नहीं हो सके। फिल्म में कुछ मिनट के लिए सलमान खान भी दिखाई दिए हैं।

इस फिल्म में देओल परिवार के अलावा कृति खरबंदा भी काफी ग्लैमरस लग रही हैं। फिल्म में कई मौके ऐसे भी आए हैं जहां कमेडी में जान नहीं लगी है। कुल मिलाकर फर्स्ट हाफ में मूवी ठीकठाक रही है, लेकिन सेकंड हाफ में कुछ स्लो होती दिखी है। अगर आप भी देओल ब्रैंड के फैन हैं तो एक बार यह मूवी देख सकते हैं। <>

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