मूवी रिव्यू: टोटल धमाल में धमाल तो है लेकिन, कन्फ्यूज़न भी कम नहीं

ऐसे में यह ज़रूरी नहीं कि सीक्वल में भी उतना ही मनोरंजन हो जितना कि पहले के भाग में रहा है।

किसी बड़ी फ़िल्म की फ्रेंचाइजी बनाना किसी चुनौती से कम नहीं। क्योंकि फ़िल्म के साथ दर्शकों की अपेक्षाएं जुड़ी होती हैं।

बावजूद इसके हाल के कुछ वर्षों में यह एक ट्रेंड सा बन गया है कि अगर कोई फ़िल्म हिट हो जाए तो उसकी सीक्वल भी ज़रूर बनती है।

लेकिन, ऐसे में यह ज़रूरी नहीं कि सीक्वल में भी उतना ही मनोरंजन हो जितना कि पहले के भाग में रहा है। कुछ ऐसा ही इंद्र कुमार द्वारा निर्देशित फ़िल्म टोटल धमाल के साथ हुआ।

टोटल धमाल में धमाल तो है लेकिन, कन्फ्यूज़न भी कम नहीं। यूं समझिये कि इंटरवल तक सारे किरदारों की पहचान कराने में और उनको स्थापित करने में ही काफी वक्त निकल जाता है।

फिल्म पूरी तरह से थकने लगती है। इंटरवल तक शायद ही कोई एक डायलॉग हो जिस पर आप हंस सकते हैं! इंटरवल तक फ़िल्म काफी उबाऊ है।

इंटरवल के बाद लगा कि सेकंड हाफ में फ़िल्म शायद समझ में आये मगर फ़िल्म की रफ्तार में मनोरंजन कहीं खोकर रह गया।

सिनेमा हॉल में बैठे लोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि हंसना कहां पर है? हालांकि लगभग आधा दर्जन सितारे हंसाने की जी तोड़ कोशिश कर रहे थे।

मगर उनके पंच पूरी तरह से बेदम साबित हुए और यह निश्चित तौर पर एक निर्देशक की असफलता कही जाएगी। हालांकि फिल्म में ग्रैंड प्रोडक्शन वैल्यू है।

बहुत बड़े पैमाने पर फ़िल्म को शूट किया गया है। फैशन भी एग्जॉटिक है। मगर राइटिंग डिपार्टमेंट और एक्शन टीम इन सितारों की पुरजोर कोशिश को कम करते हुए नजर आती हैं।

पूरी फ़िल्म में जावेद जाफरी, संजय मिश्रा के पंचायत के अलावा हंसने का मौका आपको ढूंढना होगा।

अभिनय की बात करें तो अजय देवगन, जावेद जाफरी, संजय मिश्रा, रितेश देशमुख अपने-अपने किरदारों में नज़र आते हैं।

माधुरी दीक्षित और अनिल कपूर को पर्दे पर साथ देखना सुखद लगता है। अन्य पहलु की बात करें तो फ़िल्म की सिनेमेटोग्राफी कमाल की है। फिल्म की एडिटिंग काफी ढीली है।

कुल मिलाकर टोटल धमाल एक औसत फ़िल्म है। अगर आप इन कलाकारों में से किसी के बहुत ही जबरदस्त फैन हैं तो ही आप यह फिल्म देख सकते हैं।

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