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गैर-जरूरी वस्तुओं के क्षेत्र में काम कर रही एमएसएमई को मिलने लगे नए ऑर्डर

ऑटो पा‌र्ट्स और गारमेंट्स को साल फरवरी-मार्च के मुकाबले 20-25 प्रतिशत तक नए ऑर्डर

नई दिल्ली: देश में एक जुलाई 2020 के बाद से छह करोड़ से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) का वर्गीकरण सरकार द्वारा तय नये मानदंडों के अनुरूप होने लगेगा.

सरकार ने एमएसएमई के वर्गीकरण के लिये नये मानदंड तय किये हैं. इसके तहत 50 करोड़ रुपये तक के निवेश और 250 करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाली इकाइयां मध्यम दर्जे का उद्यम कहलाएंगी.

वहीँ ऑटो पा‌र्ट्स और गारमेंट्स जैसे गैर-जरूरी वस्तुओं के क्षेत्र में काम कर रही एमएसएमई को नए ऑर्डर मिलने लगे हैं। ऑटो पा‌र्ट्स और गारमेंट्स को साल फरवरी-मार्च के मुकाबले 20-25 प्रतिशत तक नए ऑर्डर मिले हैं।

लेकिन पिछले दो महीनों के दौरान काम पूरी तरह ठप होने से इन उद्यमियों के पास वर्किंग कैपिटल की भारी कमी है। श्रमिकों के भी अपने गृह राज्य वापस चले जाने के कारण इन्हें उत्पादन की गति तेज करने में दिक्कतें आ रही हैं।

फरीदाबाद में ऑटो पा‌र्ट्स का उत्पादन करने वाले छोटे उद्यमियों ने बताया कि दोपहिया वाहनों का उत्पादन जुलाई तक 50 प्रतिशत क्षमता के साथ होने की उम्मीद है। यही वजह है कि दोपहिया निर्माता कंपनियों की तरफ से उन्हें पा‌र्ट्स बनाने के ऑर्डर मिलने लगे हैं। कन्फेडरेशन ऑफ क्लॉथ मैन्यूफैक्चरिग एसोसिएशन के मुताबिक मई अंत तक देश की 22 प्रतिशत मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट काम शुरू कर चुकी थी।

फेडरेशन ऑफ इंडियन स्मॉल मीडियम इंटरप्राइजेज (फिस्मे) के महासचिव अनिल भारद्वाज ने बताया कि एमएसएमई को नए ऑर्डर मिलने लगे हैं और काम का पहिया घूमने लगा है। बैंक की तरफ से बिना गिरवी वाले कर्ज की मंजूरी और भुगतान में तेजी की वजह से MSME को प्रोत्साहन मिल रहा है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक जून के शुरुआती चार दिनों में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज की मंजूरी दी गई और 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन किया गया।

नकदी की किल्लत

इंटीग्रेटेड एसोसिएशन ऑफ माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज के चेयरमैन राजीव चावला के मुताबिक उद्यमियों को नए ऑर्डर मिलने लगे हैं, काम भी शुरू हो गया है। लेकिन अप्रैल व मई में काम बंद होने की वजह से उद्यमियों के पास कोई नकदी नहीं है। छोटे उद्यमी माल की सप्लाई करते हैं तो उन्हें 30–60 दिनों के बीच भुगतान मिलता है। उनका कहना है कि सरकार अगर वर्किंग कैपिटल लोन की मौजूदा 20 प्रतिशत सीमा में बढ़ोत्तरी कर देती है तो इससे एमएसएमई को राहत मिल जाएगी।

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