आर्थिक तंगी से गुजर रहा MTNL,कर्मचारियों के नवंबर महीने की सैलरी अटकी

MTNL का कुल कर्ज बढ़कर 19 हजार करोड़ रुपये हो गया

मुंबई। महानगर टेलिफोन निगम लिमिटेड (MTNL) कभी केंद्र सरकार की नवरत्न कंपनी थी, लेकिन अब इसके पास कर्मचारियों को सैलरी देने तक के पैसे नहीं हैं। आर्थिक तंगी की वजह से MTNL कर्मचारियों की नवंबर महीने की सैलरी अटक गई है।

मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के अंत तक MTNL का कुल कर्ज बढ़कर 19 हजार करोड़ रुपये हो गया है। दूसरी तिमाही में 859 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है, जबकि इस साल 31 मार्च तक संचित घाटा 2,936 करोड़ रुपये था।

टेलिकॉम कंपनी की हालत काफी हद तक एयर इंडिया जैसी हो गई है, जिस पर 52 हजार करोड़ रुपये कर्ज का बोझ है। एयर इंडिया को भी अपने कर्मचारियों को मई और जुलाई की सैलरी देने में संघर्ष करना पड़ा।

जुलाई की सैलरी अगस्त के दूसरे सप्ताह में मिली, जब इसे केंद्र की ओर से 980 करोड़ रुपये का फंड मिला।

MTNL के डेप्युटी जनरल मैनेजर, बैंकिंग और बजट, ने 28 नवंबर को मुंबई और दिल्ली सर्कल के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर्स को लिखा, ‘फंड की कमी की वजह से, बैंकों को नवंबर 2018 की सैलरी जारी करने को नहीं कहा गया है।’

MTNL में अनुत्पादक कर्मचारियों की संख्या बहुत अधिक है। राजस्व का 92.2 फीसदी हिस्सा कर्मचारियों की सैलरी पर ही खर्च हो जाता है। MTNL के पास कुल 45 हजार कर्मचारी हैं। इसमें से 20,000 मुंबई में हैं। इसका मासिक सैलरी बिल 200 करोड़ रुपये है।

MTNL के ऑडिटर्स का कहना है कि कंपनी का नेट वर्थ पूरी तरह खत्म हो चुका है। कंपनी का राजस्व 2004 में 4,921.55 करोड़ रुपये था जो मार्च 2018 में गिरकर 2,371.91 करोड़ रुपये रह गया है।

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