मुंगेली पुलिस व्यवस्था कार्यप्रणाली से होगी अपराधों की रोकथाम

मनीष शर्मा:

मुंगेली: शहर में मनचले आशिको की बात हो या महिलाओं के सुरक्षा संबंधित समस्याओं से पुलिस के व्यवस्थित पेट्रोलिंग की, पुलिस शिकायतों अथवा खबरों से अचानक हरकत में आयीं तो इसके स्थायी एवं दूरगामी परिणाम देखने को नही मिल पाते है।

लंबे समय से मुंगेली शहर भीतर ही अतिक्रमणकारियों, जगह जगह चिकन, मुर्गा की खुली दुकान ने भी महिलाओं के मंदिर, कॉलेज, सब्ज़ी बाज़ार जाना मुश्किल भरा होता है। इनकी आड़ में ही मनचले आशिक़ अथवा जेबकतरे भरपूर मजा करते हैं।

इन मांसाहारी सामानों के विक्रय के लिए पुलिस अथवा म्युनिसिपल क्यों व्यवस्था नही दे पा रही है ताकि महिलाओ का सम्मानजनक आवागमन सुनिश्चित हो इसके लिए कोई विशेष अर्जी या खबरों की जरूरत नही पड़नी चाहिए जिसके बाद ही पुलिस किसी हरकत में आये।

मुंगेली पुलिस प्रशासन के समक्ष अनेको संसाधन का अभाव

बता दें वर्तमान परिवेश में मुंगेली जिले की पुलिस प्रशासन के समक्ष अनेको संसाधन का अभाव है जिसके रहने से शायद किसी घटना को त्वरित रोका जा सके। पूरे जिले में अत्याधुनिक 112 पुलिस के वाहन पहुंच चुके हैं।

ये वाहन मुंगेली जिले में अबतक क्यों नही विभाग का क्या यही दायित्व है कि कोई भी अपनी कमी या मांगों से शीर्ष स्तर अवगत कराकर शांत बैठ जाये? मुंगेली पुलिस के समक्ष कई वाहन दुर्घटना हो जाने, या जीर्णशीर्ण होने पर वापस व्यवस्था ही नही की गई।

ऐसे में पुलिसिया तंत्र कहा तक दुर्घटनाओं को रोकने में सफल रह पाएगी क्या जिले के मापदंड अनुरूप पुलिस बल है या नही? व्ही आई पी ड्यूटियों में जिले के सभी स्टाफ भेज नाममात्र के बल से क्या जिले में पुलिस का संचालन व्यवस्थित हो पायेगा।

इस सब के मद्देनजर समय समय पर व्यवस्था सुनिश्चित हो जिले में मांग अनुरूप पुलिस साधन, संसाधन, बल अन्य व्यवस्था रहे।अपराधों को रोकने अन्य जिलों की तरह एक निश्चित अन्तराल में क्राइम मीटिंग, अधिकारियों व अधीनस्थ कर्मचारियों के कम्युनिकेशन के लिए बैठक भी सुनिश्चित हो।

केवल जन्मदिन मनाने, चॉकलेट पिपरमेंट बांटने अथवा जिले के सभी थानों के प्रतिदिन अपराधों के लेखाजोखा उपलब्ध होने से अपराधों को रोकने पुलिस प्रशासन का मानना इस नवोदित जिले में बेमानी होगी।

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