ठंड की सिहरन से मुंगेली जिलेवासी परेशान, प्रशासन बेखबर…

- मनीष शर्मा

मुंगेली/ वर्ष के अंतिम यानी दिसंबर का दूसरा पखवाड़ा आरंभ हो गया है। अचानक बदले मौसम के मिज़ाज के बाद अब ठण्ड अपने पूरे शबाब पर है। पूस का माह भी लग गया है ऐसे में प्रौढ़ हो चुकी पीढ़ी को प्रेमचंद की कृति पूस की रात आज भी कण्ठस्थ ही होगी, पौराणिक मान्यता अनुसार यह मास साल भर में सबसे सर्द वाला माना भी जाता है। इस लिहाज से मुंगेली जिले के नगर पालिका व नगर पंचायतो की यह जवाबदारी है कि वे निर्धारित स्थानों पर अलाव की व्यवस्था सुनिश्चित करें। आमजनमानस के जगाने या जिला प्रशासन की फटकार के बाद यह काम हो इसका मतलब यही है कि स्थानीय निकाय के अधिकारी अपनी जवाबदेही से बाहर है।लगभग एक सप्ताह से सर्दी ने रफ्तार पकड़ ली है रात गहराते ही इन हवाओं का सामना करने में लोगों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। अमूमन सर्दी का सितम भी 31 जनवरी के आसपास तक रहता है।पता नहीं नगर पालिका को सर्दी के मौसम में अलाव की व्यवस्था करने में पसीना क्यों आता है। जब सर्दी का सितम कम होगा तब नगर पालिका, नगर पंचायतों के द्वारा अलाव की व्यवस्था की जायेगी।

बता दें अलाव के लिये लकड़ी की व्यवस्था नगर पालिका को व्यवस्था जनता के गाढ़े पसीने से संचित राजस्व से ही होना है।सोमवार को सुबह से छाये बादल और दोपहर से आरंभ हुई बूंदाबांदी ने मौसम को और अधिक ठण्डा बना दिया है। दूबर पर दो अषाढ़ की तर्ज पर सर्दी के मौसम में पानी गिरने से सर्दी का सितम और गहरा ही गया है। ऐसी परिस्थितियों में चौक चौराहों पर अलाव की व्यवस्था की जाना चाहिये लेकिन मुंगेली ज़िले में अब परंपरा सा हो गया है कि यहां किसी भी समय कोई बड़ी घटना दुर्घटनाओं के हो जाने या जनता के हो हल्ला नही होने तक प्रशासन व उनके जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों को नही जागना है ऐसे में अब अलाव के अभाव में लोग कचरा, पन्नी, पॉलीथिन आदि बीनकर कही भी जलाने मजबूर हैं जिससे प्रदूषण फैलता है और पर्यावरण को नुकसान होत है।वैसे सर्दी में तो लोग घरों में दुबके रहते हैं पर बस स्टैण्ड, जिला अस्पताल परिसर, चौक चौराहो आदि ऐसे स्थान हैं जहाँ आवाजाही चौबीसों घण्टे बनी रहती है मुंगेली जिला होने के बाद अब पर्याप्त बलो के चलते रात की गश्त में पुलिस के सिपाही भी चौक-चौराहों पर अपनी सेवाएं देते रहते हैं। रात्रि सेवा देने वाले सभी कर्मचारियों द्वारा हाड़ गलाने वाली ठण्ड में ये किस तरह अपने काम को अंजाम दे रहे होंगे यह सोचकर ही रीढ़ की हड्डी में सिहरन पैदा होने लगती है इन परिस्थितियों को देखकर आम आदमी हैरान परेशान हो सकता है पर नगर पालिका के चुने हुए प्रतिनिधि पता नहीं क्यों इस संवेदनशील मुद्दे में मौन ही साधे हुए हैं।

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