शाम होते ही लॉक डाउन में पतंगबाजी कर समय बिता रहे रहे मुंगेली के लोग

आजादी के दिन और मकरसंक्रांति में है पतंगबाजी की पुरानी परम्परा

मनीष शर्मा

मुंगेली। विश्वव्यापी कोरोना महामारी के बीच जहां लोग लॉक डाउन के चलते अपने अपने घरो में समय व्यतीत कर रहे हैं। वहीं मुंगेली के अधिकांश लोग इन दिनों शाम को बड़ी संख्या में अपने घरो की छत पर चढ़ कर पतंगबाजी का मजा ले रहे हैं।

करही कालोनी, शहर भीतर दाऊपारा,सोनारपारा, गोलबाजार, शिक्षक नगर,सिंधी कालोनी सहित शहर भर के नागरिक रोजाना देर शाम तक अपने बच्चो के साथ पतंग उड़ाते दिेखेगे। शाम होते ही आसमान में पतंगे छा जाती है और पेच लड़ाने का दौर भी शुरू हो जाता है। बता दें कि इस दौरान मुंगेलीवासी सोशल डिसटेनसिंग का भी ख्याल रखते नजर आ रहे है।

पतंग उड़ाने में सभी होते हैं एक्सपर्ट

जी हां यह सच है पतंग उड़ाने के लिए किसी को किसी ट्रेनिंग की कभी जरूरत नहीं होती है। बस पतंग और मांझा लिया और शुरू हो गए। शाम होते होते मुंगेली में आकाश पतंगों से भर जाता है और बच्चे-बूढ़े सभी इसका मजा लेते हैं।

पतंग के शौकीन धूप की नहीं करते परवाह

कोरोना वायरस में लॉक डाउन में अब फुर्सत के समय मे बच्चो के साथ बड़े भी ना धूप की परवाह कर रहे है बल्कि अचानक लौटे बचपन की यादों को फिर से ताजा करने लगे हुए हैं। चिलचिलाती धूप में भी पतंग के शौकीन अपना शौक पूरा करते हुए पतंग जरूर उड़ाते हैं। अगर मौसम सुहाना हुआ तो पतंग उड़ाने का मजा और भी बढ़ जाता है।

लगने लगा है खास बाजार

हर शहर में पतंग का एक खास बाजार होता है। मुंगेली में पुरानी पुराना बस स्टैंड, बड़ा बाजार,बलानी चौक की कुछ घरनुमा दुकानों में पतंग बनाकर बेचा जाता है पतंग उड़ाने के लिए दो तरह की डोर इस्तेमाल होती है। एक डोर सफेद रंग की होती है जिसे सादी कहते हैं और दूसरी पतंग काटने वाली होती है जिसे मांझा कहा जाता है।

आजादी के दिन और मकरसंक्रांति में है पतंगबाजी की पुरानी परम्परा

आजादी से पहले साइमन कमीशन का विरोध दर्ज कराने का बेहतरीन जरिया रहीं रंग-बिरंगी पतंगों के ट्रेंड में कई आकर्षक बदलाव तो हुए लेकिन परंपरा वही रही। अब प्रायः मकरसंक्रांति के दिन अधिकांश राज्यों के लोग पतंगबाजी का मजा लेते हैं।

पतंगों से भी भेजे जाते थे संदेश

आजकल मोबाइल फोन और इंटरनेट जैसी तकनीक के सामने पतंगों से संदेश भेजने की बात आपको आश्चर्यचकित कर सकती है। पतंगों पर कुछ मैसेज लिखकर उड़ाना बेहद पुरानी और रोमांचित करने वाली तकनीक है। आज भी कभी-कभी पतंगों पर कुछ न कुछ मैसेज लिखकर लोग 15 अगस्त के दिन पतंग उड़ाते हैं। पतंगों पर संदेश लिखने की तकनीक आजादी की लडाई के दौरान भी अपनायी गयी थी। 1927 में स्वतंत्रता सेनानियों ने साइमन कमीशन के विरोध में पतंगें उड़ाई थीं। बहुत से नौजवानों ने साइमन गो बैक के नारे वाली पतंगें आसमान में उड़ाई थीं।

Tags
Back to top button