नगर निगम कर्मचारी ने दिया ईमानदारी का परिचय

भोपाल. नगरनिगम द्वारा चलाई जा रही डोर टू डोर कचरा एकत्रीकरण योजना के अन्तर्गत वार्ड मोहल्लों में जाकर कचरा एकत्र करने में कई कर्मचारी लगे हुए हैं। ऐसे ही एक कर्मचारी हैं समाधान सोनू। जो कि नगर निगम की योजना के तहत घर-घर जाकर कचरा इकट्ठा करने का काम करते हैं।

प्रतिदिन की तरह जब सोनू ऐशबाग कॉलोनी के खटीक मोहल्ले की गली नंबर दो से राजौरा परिवार के यहां कचरा एकत्र करने गए तो राजौरा परिवार ने रोजाना की अपने घर का कचरा कर्मचारी सोनू को दे दिया। सोनू वहां से कचरा लेकर अगले ही घर की ओर जाने ही वाले थे कि सोनू का ध्यान कचरे के डिब्बे पर गया।

सोनू को लगा कि कचरे के डब्बे में और भी कुछ है। कर्मचारी ने तत्काल अपनी ट्राइसाइकिल को रोका और डिब्बे को देखा। डिब्बे को जैसे ही सोनू ने देखा वह चौंक गया उस डिब्बे में नगद पांच हजार रूपये और कुछ जरूरी कागजात रखे हुए थे। सोनू चाहता तो वह रकम अपनी जेब में रख सकता था, लेकिन उसके दिल ने ये गंवारा नहीं किया।

सोनू की ईमानदारी देख हतप्रभ रह गया राजौरा परिवार</h2>
सोनू ने दिल की आवाज सुनी और ट्राइसाइकिल पीछे खींचते हुए राजौरा परिवार को बाहर बुलाया और नगद पांच हजार रूपये और जरूरी दस्तावेज उन्हें वापस किए। ये देखकर राजौरा परिवार भी हतप्रभ रह गया, कि आज के समय में भी ऐसे ईमानदार कर्मचारी जिंदा हैं।

‘ईमानदारी की मिसाल पेश करते हुए बढ़ा दिया मान’
राजौरा परिवार के मुखिया ने बताया कि जहां एक ओर सतना के नगर निगम आयुक्त लाखों रूपये की रिश्वत लेते हुए पकड़े जा रहे हैं वहीं भोपाल नगर निगम के इस कर्मचारी ने अपनी ईमानदारी की मिसाल पेश करते हुए भोपाल का मान बढ़ा दिया।

‘नगद, दस्तावेज राजौरा परिवार को देने पहुंचा कर्मचारी’
घर की महिलाओं की लापरवाही से नगदी और दस्तावेज गलती से कचरा कलेक्शन गाड़ी तक पहुंच गए, यदि सोनू चाहता तो वह पूरा डिब्बा अपने पास रख सकता था, लेकिन सोनू ने राजौरा परिवार की हालत को समझा और डिब्बा लौटा दिया।

‘ईमानदार कर्मचारी को सम्मानित करने की घोषणा’
जब ये बात नगर निगम के अधिकारियों को पता चली तो उन्होंने ऐसे ईमानदार कर्मचारी को सम्मानित करने की घोषणा की। अधिकारियों ने कहा कि सोनू ने ईमानदारी का परिचय देकर नगर निगम का मान बढ़ाया है। जहां लोग एक-दूसरे की प्रतिस्पर्धा में अमीर बनने के लिए तमाम उल्टे सीधे काम कर रहे हैं वहीं सोनू ने लालच में न फंसकर दूसरों की मदद का भरोसा बढ़ाया है।

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