छत्तीसगढ़

साय की नियुक्ति से मरकाम को भय सता रहा, इसी घबराहट में बेसिरपैर की बातें कर रहे : भाजपा

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के प्रश्न पर पलटवार

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी और प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम द्वारा भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय को लेकर की गई टिप्पणी को कांग्रेस का प्रलाप बताया और कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष मरकाम भाजपा को अपनी कांग्रेस जैसे राजनीतिक चरित्र वाली पार्टी समझने की भूल कतई न करें।

उसेंडी व कौशिक ने कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के रूप में साय की नियुक्ति से कांग्रेस नेताओं को अब अपना जनाधार खिसकने और भाजपा के राजनीतिक विस्तार का भय सताने लगा है और इसी घबराहट में कांग्रेस अध्यक्ष मरकाम भी बेसिरपैर की बातें कर रहे हैं।

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उसेंडी व नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मरकाम का यह कहना उनकी पार्टी के नितांत अलोकतांत्रिक राजनीतिक चरित्र का परिचायक है कि प्रदेश सरकार के कामकाज पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष साय सवाल कैसे कर सकते हैं? चुनावी हार-जीत और टिकट मिलने-न मिलने को किसी की राजनीतिक योग्यता का मापदंड मानना कांग्रेस की रीति-नीति रही है, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष मरकाम यह बात अच्छी तरह याद रखें कि भाजपा इन मापदंडों के बजाय अपने नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के त्याग, समर्पण, पुरुषार्थ और पराक्रम के बल पर राजनीतिक व संगठनात्मक योग्यता का सम्मान करती है।

उसेंडी व कौशिक ने कहा कि दरअसल कांग्रेस के नेता प्रदेश सरकार की हर मोर्चे पर विफलता, प्रदेश के हर वर्ग के लोगों के साथ की गई और की जा रही वादाख़िलाफ़ी, दग़ाबाजी, भ्रष्टाचार के चलते यह बात अच्छी तरह समझ रहे हैं कि समय आने पर प्रदेश का प्रबुद्ध मतदाता छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को इतिहास के कूड़ेदान में डाल देगा, इसीलिए वे तरह-तरह के विलाप-प्रलाप कर रहे हैं।

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उसेंडी व नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कहा कि किसानों के साथ कर्ज़माफ़ी, दो साल के बकाया बोनस भुगतान, धान ख़रीदी के नाम पर किसानों की प्रताड़ना, पूर्ण शराबबंदी के नाम पर प्रदेश की जनभावनाओं से छलावा, बेरोज़गारों के भविष्य को कुचलने, महिलाओं के साथ-साथ आम आदमी की दाँव पर सुरक्षा व आत्म-सम्मान, तेंदूपत्ता संग्राहकों का दो साल के बकाया बोनस का भुगतान, उनकी बीमा योजना और आदिवासी छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति बंद कर आदिवासियों की प्रताड़ना जैसे कर्मों वाली प्रदेश सरकार ने डेढ़ साल के अपने शासनकाल में सिवाय केंद्र सरकार को कोसने और सियासी नौटंकियों के और कुछ तो किया नहीं है; अब कोरोना संक्रमण के ख़िलाफ़ जारी जंग में भी वह बुरी तरह विफल ही सिद्ध हो रही है।

उसेंडी व कौशिक ने कहा कि आज भाजपा के उंगली उठाने पर विचलित होने वाले कांग्रेस अध्यक्ष मरकाम यह बात नोट कर लें कि नए प्रदेश अध्यक्ष साय के नेतृत्व में भाजपा फिर अपना ऐसा राजनीतिक प्रभाव उत्पन्न करेगी कि प्रदेश का एक-एक मतदाता अपनी उंगली से कांग्रेस की इस नाकारा प्रदेश सरकार को सत्ता से ही बेदख़ल कर देगा।

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उसेंडी व नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कहा कि भाजपा क नए प्रदेश अध्यक्ष श्री साय के राजनीतिक प्रभाव पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मरकाम उनके पूर्व कार्यकाल को याद कर लें जब भाजपा ने उनके नेतृत्व में न केवल सन 2008 के विधानसभा चुनाव और फिर सन 2009 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को पटखनी दी थी।

कांग्रेस के लोगों द्वारा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अगले चुनाव में जीत की बधाई देने की बात को कांग्रेस नेताओं के मुंगेरीलाल के सपने बताते हुए उसेंडी व कौशिक ने कहा कि कांग्रेस साय की नियुक्ति और उनके नेतृत्व की स्वीकार्यता की चिंता न करे, बल्कि पहले अपनी गुटबाजी की चिंता करे, जहाँ कांग्रेस की प्रदेश सरकार और संगठन में सत्ता-संघर्ष अपने नित-नए पैंतरे दिखा रहा है।

गुटबाजी और अंतर्कलह में आकंठ डूबी कांग्रेस की सरकार अब तक प्रदेश के निगम-मंडलों में तो नियुक्ति कर नहीं पाई है। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया का दौरा स्थगित होना यह साफ़ संकेत है कि पार्टी के अंतर्कलह के सामने आने से सहमे कांग्रेस नेता शुतुरमर्ग की तरह अपने दम तोड़ चुके आंतरिक लोकतंत्र और सत्ता-संघर्ष से मुँह छिपाए हुए हैं।

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