नायब तहसीलदार ने गस्त के दौरान 36 भैसों को पकड़ा, मामला है काफी संदिग्ध

प्राप्त जानकारी अनुसार 36 नग भैंस गिधौरी बाजार से सरायपाली ले जा रहे थे, जो भैंस मालिक खरीदी की रसीद भी रखे हुए थे|

भटगांव / योगेश केशरवानी
नगर के उप तहसील के नायाब तहसीलदार ममता ठाकुर द्वारा 17 जनवरी की रात्रि को 36 भैंस ले जाते हुए लोगों को पकड़ा और पुराना नगर पंचायत प्रांगण में रखा गया था!

प्राप्त जानकारी अनुसार 36 नग भैंस गिधौरी बाजार से सरायपाली ले जा रहे थे, जो भैंस मालिक खरीदी की रसीद भी रखे हुए थे|

जिसे रात्रि में ही भैंस मालिकों द्वारा नायाब तहसीलदार ममता ठाकुर को बताया था लेकिन उन्होंने रात भर भैंसो को और उसके मालिकों को रोककर रखा|

फिर दिन में 9 से 10 बजे के बीच नायाब तहसीलदार ममता ठाकुर द्वारा उन्हें छोड़ दिया गया| इस पर अब प्रश्न उठने लगा है?

अगर बिना कोई जप्ती, जुर्माना, बिना कोई कार्यवाही किए बिना ही छोड़ना था तो रात भर भैंसों को और उसके मालिकों को क्यों रोक कर रखा गया था|

यदि उनके पूरे कागजात सही थे तो उनको रात भर क्यों परेशान किया गया? भैस मालिक सोना बंजारे निवासी कोसा (मूलमुला) का रहने वाला है|

उसने बताया बताया कि भैंस को गिधौरी से सरायपाली ले जा रहे थे नायाब तहसीलदार ने रोक लिया और पुलिस वाले भी साथ में थे हमारे द्वारा रसीद भी दिखाई गई पर वे नहीं माने|

इसी तरह नारायण जायसवाल निवासी मटिया (मड़वा) एवं राजकुमार नवरंग ने भी यही बताया की गिधौरी से सरायपाली ले जा रहे थे जिसे नायाब तहसीलदार और पुलिस द्वारा रोका गया है|

वही गगन कुमार वैष्णव शिवसेना प्रमुख बिलाईगढ़ इकाई रात्रि में उपस्थित थे, उनसे बात करने पर बताया कि रात्रि में घर में सो रहा था तो बाहर से आवाज आई तो निकल कर देखा तो भैंसे एवं गस्त में पुलिसकर्मी भी उपस्थित थे|

यह सब देख मामला जानना चाहा तब पता चला कि 36 भैंस भटगांव सिंघीचूवा के रास्ते ले जा रहे थे| जिसको रोकने के लिए रोकने के लिए नयाब तहसीलदार ने बोला है और इन्हें पुराना नगर पंचायत भवन प्रांगण में रखने के लिए कहा गया है|

रात भर भैंसों को रखा गया और जब सुबह तहसीलदार से पूछा गया की उन्होंने भैसों को क्यों छोड़ा तब उन्होंने बताया के सभी कागजात सही पाए गए हैं तो छोड़ दिया|

लेकिन रसीद रात्रि में ही दिखा दिया गया था तो फिर सवाल यह उठता है की यदि रात को ही रसीद देख लिए गए थे और सबकुछ ठीक था तो भैसों को रात में क्यों नही छोड़ा गया|

आखिर लोगो को परेशान करने के पीछे वजह क्या थी? –

नायब तहसीलदार ममता ठाकुर का कहना है कि मैं भ्रमण पर थी तो रास्ते पर इतने सारे भैंसे दिखे जिससे मेरी गाड़ी टकराते टकराते बच गई|

मैंने पूछताछ की कि कौन हो और इतने सारे भैंसे कहां से ला रहे हो, नौकर और चरवाहे लोग थे तो सही जानकारी नहीं दे पा रहे थे तब शंका होने पर उन्हें थाने में रुकवा दिया गया|

उसके बाद उनके द्वारा रसीद जरूर दिखा रहे थे लेकिन उनके मालिक से रात में संपर्क नहीं हो पाया, और मामला संदिग्ध लगा, इसी कारण रात को रुकवा दिया गया था!

सुबह उनके मालिक आए और कृषि परियोजना के कार्य के लिए एवं बेचने के लिए भैंसों को ले जाने की जानकारी दी गई उसके बाद छोड़ दिया गया!

नायाब तहसीलदार ममता ठाकुर द्वारा बताया गया कि भैंसों के साथ कुल 6 लोग थे लेकिन पकड़ने की कार्यवाही की जा रही थी तो उनमें से दो लोग फरार हो गए!

उन्होंने बताया सरसीवा से भटगांव भ्रमण करते हुए उनकी गाड़ी भैंसों से टकराते हुए जमगहन के पास बाल बाल बची है|

अब सवाल यह उठता है कि-

1. सरसीवा और भटगांव के बीच में जमगहन नामक गांव नहीं पड़ता? भटगांव से बिलाईगढ़ जाने वाले रास्ते पर जमगहन पड़ता है?

2. भैसों को थाने में रखने की बात कही जा रही है लेकिन उन्हें पुराना नगर पंचायत भवन प्रांगण में भैंसों को रखा गया था?

3. मामला संदिग्ध नहीं था तो 2 लोग पकड़ने की कार्यवाही के समय रात्रि में फरार क्यों हो गए?

4. जिसे नायाब तहसीलदार द्वारा नौकर और चरवाहा बताया जा रहा है उनके द्वारा खुद मालिक होने की बात हमसे कही गई थी और रसीद पेश किया गया था?

5. बिना कार्यवाही के ही भैंसों और मालिकों को छोड़ दिया गया? पूरा मामला संदिग्ध नजर आ रहा है! मामले में कहीं ना कहीं गुपचुप तरीके से अधिकारियों द्वारा भारी लेनदेन का अंदेशा जताया जा रहा है!

 

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