नमामि गंगे योजना को 3 साल पूरे, शुरूआत में तूफानी,गुजरते वक्त के साथ बैठकों में सिमटी

सत्ता संभालने के बाद भी मोदी ने स्वच्छ गंगा का वादा दोहराया, लेकिन 4 साल गुजर जाने के बाद भी गंगा की स्थिति में खास सुधार होता नहीं दिख रहा

नई दिल्ली, नरेंद्र मोदी को केंद्र की सत्ता पर काबिज हुए 4 साल हो चुके हैं और उन्होंने 2014 में जिन कई लुभावने वादों के साथ ऐतिहासिक जीत हासिल की उनमें गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाना भी था. सत्ता संभालने के बाद भी मोदी ने स्वच्छ गंगा का वादा दोहराया, लेकिन 4 साल गुजर जाने के बाद भी गंगा की स्थिति में खास सुधार होता नहीं दिख रहा.

पीएम मोदी ने सत्ता में आने के बाद कहा था कि शहर और संस्कृति को बचाने के लिए गंगा नदी का साफ होना सबसे पहली जरूरत है. मां गंगा चाहती हैं कि कोई ऐसा बेटा तो आए जो उसे इस गंदगी से बाहर निकाले.

शुरुआत में दिखी थी तेजी

सत्ता में आने के तुरंत बाद ही गंगा की सफाई पर मोदी सरकार हरकत में आई. गंगा सफाई के लिए अलग से मंत्रालय बनाया गया, जिसकी जिम्मेदारी उमा भारती को दी गई. एक एक्शन कमेटी भी बनी, जिसमें उमा भारती के अलावा नितिन गडकरी, प्रकाश जावड़ेकर, पीयूष गोयल और श्रीपद नाइक जैसे दिग्गज शामिल किए गए.

गंगा की सफाई से जुड़े अभियान की शुरुआत तो सरकार ने तूफानी अंदाज में की, लेकिन गुजरते वक्त के साथ यह योजना भी धरातल पर आने के बजाए महज बयानों और बैठकों में ही सिमटती दिखी. मोदी सरकार को सत्ता में आए 4 साल और नमामि गंगे योजना शुरू हुए 3 साल हो चुके हैं लेकिन स्थिति में सुधार की बात क्या कही जाए अभी तो इससे जुड़े ढेरों प्रोजेक्ट्स को मंजूरी तक नहीं मिल सकी है.

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