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नमन: कोरोना से लड़ाई हार गया वह योद्धा, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर दिया!

उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

नई दिल्ली: पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है। इन परिस्थितियों में हमारे समाज में ऐसे कई लोग मौजूद हैं, जिन्होंने समाज को धर्म, जात पात के बंधनों से तोड़कर मानवीय पक्ष को मजबूत करने का काम किया है। इन्हीं लोगों में एक थे, समाज को इस मानवता का आईना दिखाने वाले दिल्ली के आरिफ खान।

वही आरिफ, जिन्होंने मानवीय संवेदनाओं तक को झकझोर दिया। आज वही आरिफ इस दुनिया को अलविदा कह गए हैं। आरिफ का कोरोना संक्रमण से निधन हो गया है। इस निधन की खबर से हर कोई स्तब्ध है। उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

उपराष्ट्रपति ने ट्वीट कर कहा, कोविड महामारी के विरुद्ध अभियान के समर्पित योद्धा दिल्ली के आरिफ खान की मृत्यु के समाचार से दुखी हूं। महामारी के दिनों में अपनी एम्बुलेंस से आपने मृतकों की सम्मानपूर्वक अंत्येष्टि में सहायता की। ऐसे समर्पित नागरिक की मृत्यु समाज के लिए क्षति है।

दिल्‍ली के सीलमपुर इलाके में रहने वाले आरिफ खान एक सच्चे कोरोना वॉरियर थे। एम्बुलेंस ड्राइवर आरिफ ने अपनी जान जोखिम में डालकर 200 से ज्यादा मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया। उन्होंने न केवल लोगों को अस्पताल पहुंचाया बल्कि 100 से अधिक शवों को अंत्येष्टि के लिए श्मशान तक लेकर गए। कोरोना वायरस से संक्रमित आरिफ खान का शनिवार की सुबह निधन हो गया। उनका उपचार हिंदूराव अस्पताल में चल रहा था।

आरिफ खान पिछले 25 साल से शहीद भगत सिंह सेवा दल के साथ जुड़े थे। वह फ्री में एम्बुलेंस की सेवा मुहैया करवाते। लोगों की हर संभव मदद के लिए हर दम तैयार रहते। पिछले सात महीने से आरिफ खान कोरोना के मरीजों को उनके घर से अस्पताल और आइसोलेशन सेंटर तक ले जाने का काम कर रहे थे। आरिफ ने धर्म के पाखंडों को दरकिनार कर अपने हाथों से 100 से अधिक हिंदुओं के शवों का अंतिम संस्कार किया।

शहीद भगत सिंह सेवा दल के अनुसार, किसी कोरोना मरीज की मौत के बाद परिजनों को आर्थिक मदद की भी दरकार होती थी, तो आरिफ उनकी मदद में जुट जाते। आरिफ की तबीयत 3 अक्टूबर को खराब हुई थी। तब भी वह कोरोना संक्रमित को लेकर अस्पताल जा रहे थे।

आरिफ ने तबीयत बिगड़ने पर कोरोना टेस्ट कराया। इसके बाद उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। परिजनों के मुताबिक जिस दिन उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, उसी दिन उनका निधन हो गया। वे परिवार में कमाने वाले इकलौते सदस्य थे। कई संगठनों ने आरिफ को असली कोरोना वॉरियर बताते हुए सरकार से एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

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