विद्युत विनियामक आयोग के चेयरमैन नारायण सिंह हुए रिटायर

रायपुर : 78 बैच के आईएएस नारायण सिंह विद्युत विनियामक आयोग के चेयरमैन पैड से पांच साल के कार्यकाल के बाद 13 जुलाई को रिटायर हो गए। उनकी सेवा निवृत्ति 15 जुलाई को समाप्त हो रहा थी लेकिन, 14 – 15 को छुट्टी होने के कारण दो दिन पहले उन्हें आयोग से रुखसत होना पड़ा। राज्य सरकार ने मनोज डे के रिटायर होने पर जुलाई 2013 में नारायण को इस रेगुलेटरी कमीशन का चेयरमैन बनाया था।

इसके लिए रिटायरमेंट से कुछ महीने पहले ही नारायण ने भारतीय प्रशासनिक सेवा से वीआरएस ले लिया था। वे 78 बैच के आईएएस थे। तथा 79 बैच के सुनिल कुमार को जब 2012 में चीफ सिकरेट्री बनाया गया तो उसकी क्षतिपूर्ति की तौर पर नारायण सिंह को आयोग के चेयरमैन का पद दिया गया था।

नारायण के बाद बिजली विनियामक आयोग के चेयरमैन के लिए रिटायर आईएएस डीएस मिश्रा और गणेश शंकर मिश्रा प्रबल दावेदार बताए जा रहे हैं। दोनों के लिए सत्ता के गलियारों में तगड़ी लाबिंग चल रही है। एक लॉबी चाह रही कि डीएस मिश्रा को इस पद पर बिठा दिया जाए तो दूसरी चाहती है जीएस की ताजपोशी हो जाए।

आयोग का चेयरमैन चीफ सिकरेट्री रैंक का पद है। रिटायर चीफ सिकरेट्री एसके मिश्रा इसके पहले अध्यक्ष बनाए गए थे। उसके बाद नारायण सिंह भी उसी के समकक्ष थे। यदि रैंक की बात करें तो डीएस मिश्रा का पलड़ा भारी दिख रहा है। मिश्रा 82 बैच के आईएएस थे। वे फिलहाल सहकारिता आयोग के चेयरमैन हैं।

यह नया आयोग है इसलिए वहां बैठने के लिए दस बाई 12 का कमरा और दो-चार कुर्सी के अलावा कुछ भी नहीं है, जो किसी नौकरशाह को अट्रैक्ट करे। लेकिन, उनकी राह में दिक्कत इसलिए होगी कि रिटायरमेंट के साल भर बाद तक वे खाली बैठ गए थे। डेढ़ साल बाद उनकी ताजपोशी हुई। हो सकता है, उस समय की विघ्न बाधाएं अब कमजोर हो गई हों मगर सरकार ये तो सोचेगी ही एक आदमी को दो-दो बार कैसे उपकृत किया जाए। यद्यपि, उनके लिए जोर तो तगड़ा लगाया जा रहा है।

दूसरे कंडीडेट जीएस मिश्रा प्रमुख सचिव से रिटायर हुए हैं। रैंक में जरूर वे नीचे हैं। लेकिन, माटी पुत्र होने का लाभ उन्हें जरूर मिलेगा। सरकार से उनकी नजदीकी भी छिपी नहीं है। वे हमेशा अच्छे पदों पर रहे हैं। सीएम के जिला राजनांदगांव का कलेक्टर भी रहे हैं। रिटायरमेंट के बाद पोस्टिंग का इंतजार कर रहे जीएस का भी इस पद पर मजबूत दावा है।

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