मध्यप्रदेशराज्य

नारू खान ने उज्जैन के महाकाल मंदिर को दान की ऑटोमेटिक घंटी

सेंसर के सामने श्रद्धालु का हाथ आते ही घंटी ऑटोमेटिक बज जाती है

उज्जैन: वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के मद्देनजर लॉकडाउन के बाद अनलॉक वन में खुले महाकाल मंदिर मैं श्रद्धालुओं को कोरोना संक्रमित होने से बचाने के लिए घंटी बजाने पर सरकार द्वारा पाबंदी लगाने के बाद मंदसौर के रहने वाले नारू खान ने उज्जैन के महाकाल मंदिर को ऑटोमेटिक घंटी दान की है. अब श्रद्धालु बिना हाथ लगाए घंटी बजा सकेंगे.

इस ऑटोमेटिक घंटी के चलते श्रद्धालु महाकाल मंदिर में दर्शन के बाद घंटी बजा कर अपनी आस्था को पूर्ण कर रहे हैं. इस घंटी को बजाने के लिए किसी भी तरीके से इसे छूने की जरूरत नहीं पड़ती है. नारू खान ने घंटी को एक सेंसर से जोड़ा है. सेंसर के सामने श्रद्धालु का हाथ आते ही घंटी ऑटोमेटिक बज जाती है.

मंदसौर के रहने वाले नारू खान वैसे तो कम पढ़े लिखे हैं, लेकिन शुरू से ही वह ऐसे इनोवेशन करते रहे हैं. मंदसौर में नारू खान इलेक्ट्रॉनिक्स का बिजनेस भी करते हैं. अनलॉक वन में जब महाकाल मंदिर खुला तो श्रद्धालु दर्शन भगवान के दर्शन कर पा रहे थे, लेकिन उनकी आस्था में घंटी बजाने को लेकर कहीं ना कहीं कमी दिखाई दे रही थी.

श्रद्धालुओं की आस्था को पूर्ण करने के लिए मुस्लिम समाज के नारू खान ने सेंसर वाली घंटी बनाकर ना सिर्फ हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल को पेश की बल्कि उन श्रद्धालुओं की आस्था को भी परिपूर्ण किया जो दर्शन के बाद भगवान के सामने घंटी बजाना चाहते थे. श्रद्धालु सेंसर के सामने हाथ लाते हैं और घंटी बजने लगती है.

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