8 दिसम्बर को होगी नेशनल लोक अदालत, राजीनामा योग्य मामलों को किया शामिल

नेशनल लोक अदालत में विभिन्न सिविल मामले और राजीनामा योग्य आपराधिक मामलों को अंतिम रूप से निराकृत करने के उद्देय से सुनवाई हेतु रखा गया

रायपुर : राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं छ.ग. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के निर्देशनुसार रायपुर जिला न्यायालय एवं जिले के अन्य सिविल न्यायालयों में 08 दिसम्बर 2018 को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है।

इस नेशनल लोक अदालत में विभिन्न सिविल मामले और राजीनामा योग्य आपराधिक मामलों को अंतिम रूप से निराकृत करने के उद्देय से सुनवाई हेतु रखा गया है।

इसके संबंध में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर के द्वारा पिछले कई दिनों से तैयारियॉ की जा रही है। सभी न्यायालयों द्वारा अपने-अपने स्तर पर मामले के पक्षकारों की पूर्व बैठक बुलायी जा रही है।

इसी कड़ी में जिला न्यायाधीश/ अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर रामकुमार तिवारी ने मोटर दुर्घटना दावा प्रकरणों की सुनवाई करने वाले न्यायाधीशगण, बीमा कंपनी के अधिकारी, मामलों की पैरवी करने वाले अधिवक्तागण की आगामी नेशनल लोक अदालत के संबंध में बैठक लेकर अधिकाधिक मामलों का निराकरण करने को कहा।

आयोजित की जाने वाली नेशनल लोक अदालत के संबंध में जानकारी देते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष राम कुमार तिवारी ने बताया कि रायपुर जिला न्यायालय में लंबित लगभग पचास हजार मामलों में से चेक बाउंस एवं मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण बडी संख्या में है

और ये मामले राजीनामा योग्य है और यदि पक्षकारों द्वारा इन मामलों का राजीनामा के माध्यम से नेशनल लोक अदालत में निराकरण कराया जाता है, तो पक्षकारों को शीघ्र न्याय प्राप्त होगा एवं न्यायालय में लंबित प्रकरणों की संख्या में भी कमी आएगी, साथ ही प्रकरणों का इस प्रकार निराकरण होगा, जिससे दोनों पक्षों को संतुटि प्राप्त होगी और वे अपने मामलें का स्वयं ही संतोप्रद निराकरण कर पाएंगे।

प्राधिकरण के सचिव उमेश उपाध्याय ने बताया कि इस नेशनल लोक अदालत में आपराधिक मामले, सिविल मामले, चेक बाउन्स के मामले, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, विद्युत चोरी, एवं अन्य वियों से संबंधित मामले रखे गए हैं और रायपुर के साथ साथ गरियाबंद, तिल्दा, राजिम और देवभोग में भी लोक अदालत आयोजित होगी।

नेशनल लोक अदालत में अब तक न्यायालय में लंबित लगभग 3000 से अधिक मामले और 900 से अधिक प्रीलिटिगेशन प्रकरण सुनवाई हेतु नियत किए गए हैं।

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