विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया गया

अंबिकापुर: संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, अंबिकापुर के प्रशासनिक भवन के पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल का 144 वां जन्मदिन राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय एकता का शपथ दिलाया गया।

अपने उद्बोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रोहिणी प्रसाद ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल को लोह पुरुष इसलिए कहा गया कि वे नेहरू के बाद सबसे बड़े व्यक्ति थे। कुलपति ने उनके व्यक्तित्व पर आधारित अनेक प्रसंगों के द्वारा उनके लौह व्यक्तित्व को स्थापित किया। उन्होंने बताया कि यदि पंडित जवाहरलाल नेहरू के स्थान पर सरदार जी प्रधानमंत्री होते तो देश का भविष्य कुछ और होता। उन्होंने बताया कि देश में आजादी आने के उपरांत हैदराबाद और भोपाल दोनों रियासतों को भारतीय गणतंत्र में लाने की उनकी दृष्टि अद्वितीय थी, क्योंकि नेहरू जी को भी उनके विचारों के आगे झुकना पड़ा था।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव विनोद कुमार एक्का ने लोह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके जन्म दिन को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाना, गौरव की बात है क्योंकि देश को आजादी दिलाने में सरदार पटेल की विशेष भूमिका थी। उसके उपरांत 500 देशी रियासतों को आजादी के बाद भारतीय गणतंत्र में सम्मिलित कराना एक बहुत बड़ी चुनौती थी, जिसे उन्होंने पूर्ण किया। देश में अनेक जाति, धर्म और संप्रदाय के लोग रहते हैं। यह अनेकता में एकता और हमारे देश की विशेषता है। इस दृष्टि से भारत एक अजायबघर है। गण, तंत्र और समूह शब्द एक ही होता है।

1950 में भारत गणतंत्र के रूप में स्थापित हुआ। उन्होंने राष्ट्रीयता का अर्थ परिभाषित करते हुए कहा कि पाकिस्तान एवं चीन में बंदूक लेकर खड़े हो जाना ही राष्ट्रीयता नहीं है अपितु परिवार, समाज, देश की एकता के लिए जीना ही राष्ट्रीयता है। प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें, यही राष्ट्रीय एकता और विकास है। उन्होंने कहा कि हमें चिंतन करने की आवश्यकता है कि आज क्यों राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता पड़ी है। महापुरुषों ने राष्ट्रीय एकता के लिए जो संदेश दिया, वह आज अनुकरणीय है।

राष्ट्रीय एकता दिवस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पी.आर.ओ.डॉ राजकुमार उपाध्याय, डीएसडब्ल्यू सुदीप श्रीवास्तव, डॉ नेहा शर्मा, श्रीसमन नारायण उपाध्याय, डॉ धीरज कुमार यादव, डीपीएस तिवारी,शोभना सिंह, डॉ अभय मिश्रा, पी डी बर्मा और ए एन विश्वकर्मा, वजीर आलम सहित अनेक अधिकारी, अध्यापक, छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन एनएसएस के समन्वयक डॉ अनिल कुमार सिन्हा ने किया।
इसकी जानकारी विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ राजकुमार उपाध्याय ने दी है।

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