कला एवं समाजकार्य विभाग द्वारा ‘‘कोविड 19 के बाद का समाज‘‘ विषय पर राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन

अम्बिकापुर: कला एवं समाजकार्य विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आष्वासन प्रकोष्ठ, श्री साई बाबा आदर्ष महाविद्यालय, अम्बिकापुर के द्वारा ‘‘कोविड 19 के बाद का समाज‘‘ विषय पर राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के प्राचार्य डॉ. राजेष श्रीवास्तव के स्वागत उद्बोधन के साथ हुआ। वेबीनार के संयोजन डॉ. रवीन्द्र नाथ शर्मा के सभी विषेषज्ञ एवं विषय प्रर्वतक का परिचय प्रस्तुत किया गया। सर्वप्रथम विषय विषेषज्ञ के रूप में उपस्थित प्रो. दिवाकर शर्मा ने कोविड 19 के त्रासदी और उससे निर्मित समाजिक महत्व पर प्रकाष डाला।

आपने विगत वर्षों में कोविड 19 के द्वारा आयी उस सामाजिक, आर्थिक संघर्ष को इंगित किया, जिससे हमारे समक्ष एक गंभीर चुनौती पेष की है। कोविड ने हमारे उस चेतना को झंझोरा है जिससे हमारे विकास का समूल पक्ष प्रभावित हुआ है। जहां एक ओर हमारे समक्ष जीवन यापन की चुनौती निर्मित हुई है। बेरोजगारी, घरेलू हिंसा, सामाजिकता के ताने बाने को नये सिरे से चिंतन करने को बाध्य किया तो वहीं दूसरी तरफ अनेक ऐसे अवस्था को पेष किया जिससे हमने भावी संकटों को दूर करने में स्वयं को तैयार पाया है। विषय विषेषज्ञ के रूप में अपने उद्बोधन के डॉ. प्रीति शर्मा, रायपुर ने कोविड के दौरान उपजी मनोवैज्ञानिक तनावों और तकनीकी निर्भरता पर प्रकाष डाला। आपने कोविड 19 के कारण समाज में आयी बेरोजगारी, पलायन जैसी समस्या और उसके समाधान की भावी समस्याओं पर भी प्रकाष डाला।

विषय विषेषज्ञ के रूप मंे उपस्थित डॉ. लोकेष्वर सिंह गजपाल, रायपुर ने कोविड 19 के पूर्व पष्चात और कोविड के दौरान सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक समस्याओं को स्पष्ट किया। कोविड 19 संक्रमण के दौरान अपने एकांकीपन और समायोजन को जिस प्रकार तकनीकी सहायता से लोगों ने झेला वह अपने आप में जीवन संघर्ष की अदभुत मिसाल है। लगभग सभी संस्थाओं ने अपने अपने संस्कारों को तकनीकी समायोजन से पूर्ण किया। विषय विषेषज्ञ डॉ. संजय जोषी, नीमच, म.प्र. ने कोविड 19 के पष्चात के सामाजिक संबंधों में आये परिवर्तनों और उसके बदलते स्वरूप को प्रस्तुत किया। आपने लॉकडाउन के दौरान भौतिकता की अंधी दौड़ की उपादेयता को भी इंगित किया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में संयोजक डॉ. रवीन्द्र नाथ शर्मा, आयोजन सचिव रौनक निषा, श्रीमती वंदना पाण्डेय, डॉ. विनोद साहू, अजीत मिश्रा, देवेन्द्र दास सोनवानी एवं समस्त प्राध्यापकों की विषेष भूमिका रही। कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती वंदना पाण्डेय तथा आभार प्रदर्षन रौनक निषा ने किया।

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