नवरात्रि विशेष: आज मां दुर्गा का छठा अवतार मां कात्यायनी स्वरूप की होती है पूजा

कात्यायन ऋषि की पूजा ग्रहण कर दशमी को महिषासुर का किया था वध

आज चैत्र के नवरात्र का छठा दिन है और आज के दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप कात्यायनी देवी की पूजा की जाती है. महर्षि कात्यायन के यहां पुत्री के रूप में उत्पन्न होकर माता ने चैत्र कृष्ण चतुर्दशी को जन्म लेकर शुक्ल सप्तमी, अष्टमी तथा नवमी तक तीन दिन कात्यायन ऋषि की पूजा ग्रहण कर दशमी को महिषासुर का वध किया था.

नवरात्र के छठे दिन कलश स्थापित करें माता के परिवार में शामिल देवी देवता की पूजा करें जो देवी की प्रतिमा के दोनों तरफ विरजामन हैं. इनकी पूजा के पश्चात देवी कात्यायनी जी की पूजा कि जाती है. पूजा की विधि शुरू करने पर हाथों में फूल लेकर देवी को प्रणाम कर देवी के मंत्र का ध्यान किया जाता है.

तीन नेत्रों से विभूषित माता के मुख पर सौम्यता है. इनका ध्यान करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है. माता महाभय से भक्त की रक्षा करती हैं. इनकी उपासना और आराधना से भक्‍तों को अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्‍ति होती है. भक्‍तों के सभी रोग, शोक, संताप और भय नष्‍ट हो जाते हैं. इसके साथ ही मां कात्‍यायनी की पूजा से भक्‍तों के सभी जन्‍म के पापों का नाश भी हो जाता है.

मां कात्यायिनी का मंत्र:

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहन. कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी.

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