उड़न सिख मिल्खा सिंह के निधन पर नवीन जिंदल ने जताया शोक

उड़न सिख के नाम से मशहूर महान धावक पद्मश्री मिल्खा सिंह का शुक्रवार देर रात निधन

रायपुर: उड़न सिख के नाम से मशहूर महान धावक पद्मश्री मिल्खा सिंह का शुक्रवार देर रात निधन हो गया। जिन्दल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) के चेयरमैन और कुरुक्षेत्र के पूर्व सांसद श्री नवीन जिन्दल ने उनके निधन पर शोक जताया है।

ट्वीटर के माध्यम से शोक व्यक्त करते हुए श्री नवीन जिन्दल ने कहा है कि मिल्खा सिंह राष्ट्र के नायक थे। उनका जीवन और उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेंगी। ईश्वर उनके परिवार को यह पीड़ा सहन करने की शक्ति दे।

पद्मश्री‍ मिल्‍खा सिंह का शुक्रवार देर रात निधन हो गया। उन्‍होंने रात 11:30 बजे अंतिम सांस ली। मिल्खा सिंह कोरोना वायरस से तो उबर चुके थे लेकिन वह पोस्ट कोविड परेशानियों से पीड़ित थे। वह 91 साल के थे। पांच दिन पहले ही उनकी पत्नी निर्मल मिल्‍खा सिंह का भी पोस्‍ट कोविड परेशानियों के कारण निधन हुआ था।

गौरतलब है कि मिल्खा सिंह की 17 मई को कोरोना रिपोर्ट पॉजटिव आई थी। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहां कोरोना की रिपोर्ट नेगटिव आने के बाद 31 मई को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी। इसके बाद वह चंडीगढ़ के सेक्टर-8 स्थित अपने घर में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए आराम कर रहे थे।

तीन जून को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और आक्सीजन लेवल गिरने के बाद उन्हें पीजीआई में भर्ती करवाया गया था। इससे पहले 13 जून को उनकी पत्नी निर्मल मिल्खा सिंह का कोरोना महामारी से निधन हो गया था। पोस्ट कोविड परेशानियों के कारण मिल्खा सिंह का भी कल देर रात निधन हो गया। इससे खेल जगत में शोक की लहर है।

मिल्खा सिंह एकमात्र ऐसे भारतीय धावक हैं जिन्हें एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों 400 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक मिला है। 1958 और 1962 के एशियाई खेलों में भी उन्हें स्वर्ण पदक मिला।

उन्होंने 1956 में मेलबर्न, 1960 में रोम और 1964 के तोक्यो ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में भी हिस्सा लिया। उनका ऐतिहासिक कीर्तिमान 1960 के रोम ओलंपिक का है, जिसमें 400 मीटर दौड़ में उन्हें चौथा स्थान मिला था। 45.73 सेकंड में दौड़ पूरी करने का उनका राष्ट्रीय रिकॉर्ड अगले 40 साल तक बरकरार रहा।

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