राष्ट्रीय

नैविगेशन सैटेलाइट IRNSS-1 लॉन्च, इसरो को मिली बड़ी सफलता

IRNSS-1 सैटेलाइट पुराने IRNSS-1H की जगह लेगा जिसकी लांचिग पिछले साल असफल हो गई थी.

नई दिल्ली: इसरो ने आज अपने नए नैविगेशन सैटेलाइट को अन्तरिक्ष में लॉन्च किया, इस सैटेलाइट का नाम इंडियन रीजनल नैविगेशन सैटेलाइट सिस्टम यानेकी आईआरएनएसएस-1 है. इसरो ने इसे आज सुबह चार बजे आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी-सी41 रॉकेट के जरिये लांच किया. यह नई आईआरएनएसएस-1 सैटेलाइट पुराने आईआरएनएसएस-1एच की जगह लेगा जिसकी लांचिग पिछले साल असफल हो गई थी.

आईआरएनएसएस-1 आई को रॉकेट पीएसएलवी-सी41 के साथ मिशन को आज सुबह चार बजकर चार मिनट पर प्रक्षेपित किया। गौरततलब है कि पीएसएलवी-सी41/आईआरएनएसएस-1 आई स्वदेश ई-तकनीक से निर्मित 9वां उपग्रह है।

इस सैटेलाइट से भारतीय नैविगेशन मैप सिस्टम की ताकत बढ़ेगी। इसकें तहत भारत ने आठ सैटेलाइट लांच किए हैं, जिसमें से आईआरएनएसएस-1एच को छोड़कर सभी सफल रहे। सैटेलाइट की मदद से नक्शा बनाने, समय के सटीक आंकलन, नैविगेशन और समुद्री नैविगेशन में मदद मिलेगी। यह सेना के लिए काफी कारगर होगा।

खबरों के अनुसार आईआरएनएसएस-1 आई अब आईआरएनएसएस-1डी की जगह लेगा जो सात नौवहन उपग्रहों में से पहला है और यह तीन रुबिडियम परमाणु घड़ियों के फेल होने के बाद निष्प्रभावी हो गया था। सातों उपग्रह नैवआईसी 9वां उपग्रह पुंज का हिस्सा हैं। यह प्रक्षेपण प्रतिस्थापन उपग्रह भेजने का इसरो का दूसरा प्रयास है।

आईआरएनएसएस-1आई मिशन प्रक्षेपण जीएसएलवी एमके-दो के जरिए जीसैट-6ए प्रक्षेपण के 14 दिन बाद हुआ। रॉकेट ने हालांकि जीसैट-6ए को कक्षा में प्रक्षेपित कर दिया था, लेकिन इसरो का उपग्रह से संपर्क टूट गया।

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