Navratri 2021: नवरात्र में 120 साल बाद पांच दिन रवि योग, कार्य होंगे सिद्ध

रायपुर। आश्विन यानी क्वांर नवरात्र में इस बार 120 साल बाद पांच बार रवि योग का संयोग बन रहा है। साथ ही दो दिनों तक त्रियोग भी है। इन संयोगों को सभी तरह के कार्यों के लिए शुभ माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्य डॉ. दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार रवि योग में किसी भी नए कार्य की शुरुआत करना अथवा स्वर्ण, रजत एवं अन्य धातुओं की खरीदारी करने से सौभाग्य बढ़ेगा। रवि योग को सूर्य से संबंधित माना जाता है। सूर्य, आत्मा का तत्व है।

यदि लंबे समय से स्वास्थ्य गड़बड़ हो, हानि हो रही हो, व्यसन के कारण परेशानी हो रही हो तो रवि योग में देवी पूजन करने से परेशानी दूर होगी। नवरात्र के दौरान सर्वार्थसिद्धि, अमृत, रवि योग, द्विपुष्कर योग, त्रिपुष्कर योग भी पड़ रहा है। इन योगों में भी खरीदारी करना अथवा नया व्यवसाय करना विशेष लाभदायी माना जाता है।

तिथिवार योगों का संयोग

7 अक्टूबर, प्रतिपदा तिथि- नवरात्र पर घट स्थापना पर सर्वार्थसिद्धि योग

9 अक्टूबर तृतीया-चतुर्थी- त्रियोग में प्रीति योग, शुभ योग और रवि योग

10 अक्टूबर पंचमी तिथि- रवि योग

11 अक्टूबर षष्ठी – त्रियोग में सौभाग्य योग, पदम योग और रवि योग

12 अक्टूबर सप्तमी – रवि योग

14 अक्टूबर, नवमी – रवि योग

घट स्थापना का मुहूर्त

वृश्चिक लग्न – सुबह – 8.56 से 11.11 बजे

अभिजीत मुहूर्त – सुबह – 11.36 से 12.24 बजे

कुंभ लग्न – दोपहर 3.05 से 4.39 बजे

वृषभ लग्न – रात्रि 7.53 से 9.52 बजे

देवी मां का डोली पर आना शुभदायी

ज्योतिषाचार्य होस्केरे के अनुसार, नवरात्र के पहले दिन जो वार पड़ता है, उस वार के अनुसार माता की सवारी होती है। देवी महात्म्य के श्लोक के में कहा गया है कि “शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे। गुरौ शुक्रे च डोलायां, बुधे नौका प्रकीत्र्तिता”। इस श्लोक का अर्थ है कि सोमवार-रविवार को नवरात्र पड़े तो मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती है।

यदि शनिवार और मंगलवार को नवरात्र का शुभारंभ हो तो माता घोड़े पर आती है। गुरुवार और शुक्रवार को नवरात्र शुरू हो तो माता डोली में आती हैं। इसी तरह बुधवार को नवरात्र प्रारंभ होने पर माता नाव पर सवार होकर आती हैं। आश्विन नवरात्र का शुभारंभ गुरुवार को हो रहा है इसलिए माता डोली पर आ रही है, डोली पर मां का आना शुभदायी संकेत है।

30 हजार से ज्यादा जोत जगमगाएगी

महामाया मंदिर में जिन श्रद्धालुओं ने चैत्र नवरात्र के लिए पंजीयन करवाया था, अब उनकी जोत आश्विन यानी क्वांर नवरात्र में प्रज्ज्वलित की जा रही है। इसके अलावा रावांभाठा के बंजारी मंदिर, आकाशवाणी के काली मंदिर, कुशालपुर के दंतेश्वरी मंदिर, पुरानी बस्ती के शीतला मंदिर, ब्राह्मणपारा के कंकाली मंदिर समेत अन्य छोटे मंदिरों में भी तैयारी पूरी हो चुकी है। अनुमानत: इस बार 30 हजार से अधिक जोत प्रज्ज्वलित होंगे।

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