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Navratri Day 8: मां महागौरी की पूजा से सुखी होगा जीवन, जानें पूजा विधि, मंत्र

उत्पत्ति के समय महागौरी की उम्र आठ साल थी इसलिए इनकी पूजा अष्टमी के दिन की जाती है.

शारदीय नवरात्रि २०२० (Shardiya Navratri 2020/Navratri Ashtami Day): आज शारदीय नवरात्रि का आठवां दिन है. इसे अष्टमी भी कहा जाता है. अष्टमी को मां दुर्गा के आठवें स्वरुप महागौरी की पूजा की जाती है. ऐसा माना जाता है कि महागौरी की पूजा करने से लोगों के पापों का नाश होता है. महागौरी ने घोर तपस्या कर गौर वर्ण प्राप्त किया था. अतः इन्हें उज्जवल स्वरूप की महागौरी धन, ऐश्वर्य, प्रदायनी, चैतन्यमयी, त्रैलोक्य पूज्य मंगला शारिरिक, मानसिक और सांसारिक ताप का हरण करने वाली माता महागौरी का नाम दिया गया है.

उत्पत्ति के समय महागौरी की उम्र आठ साल थी इसलिए इनकी पूजा अष्टमी के दिन की जाती है. ये देवी सदा सुख और शान्ति देती है. अपने भक्तों के लिए यह अन्नपूर्णा स्वरूप है. इसलिए मां के भक्त अष्टमी के दिन कन्याओं का पूजन और सम्मान करते हुए महागौरी की कृपा प्राप्त करते हैं.

यह धन-वैभव और सुख-शान्ति की अधिष्ठात्री देवी है. सांसारिक रूप में इसका स्वरूप बहुत ही उज्जवल, कोमल, सफेद वर्ण तथा सफेद वस्त्रधारी चतुर्भुज युक्त एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे हाथ में डमरू लिए हुए गायन संगीत की प्रिय देवी है, जो सफेद वृषभ यानि बैल पर सवार हैं.

मां महागौरी की आराधना से मनोवांछित फल प्राप्त किया जा सकता है. उजले वस्त्र धारण किये हुए महादेव को आनंद देवे वाली शुद्धता मूर्ती देवी महागौरी मंगलदायिनी हैं.प्रिय भोग- नवरात्रि के आठवें दिन माता को नारियल का भोग लगाएं व नारियल का दान कर दें. इससे संतान संबंधी परेशानियों से छुटकारा मिलता है.

आयुर्वेदिक औषधीय गुण- अष्टम महागौरी को प्रत्येक व्यक्ति औषधि के रूप में जानता है क्योंकि इसका औषधि नाम तुलसी है जो प्रत्येक घर में लगाई जाती है. तुलसी सात प्रकार की होती है.

महागौरी का बीजमंत्र:

“सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके.
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते.
अर्थः- नारायणी! तुम सब प्रकार का मङ्गल प्रदान करनेवाली मङ्गलमयी हो.कल्याणदायिनी शिवा हो. सब पुरुषार्थो को सिद्ध करनेवाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रोंवाली एवं गौरी हो. तुम्हें नमस्कार है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं.

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