छत्तीसगढ़

नवरात्रि स्पेशल : बंजारी माता मंदिर रायगढ़,बंजारों ने रखी थी मंदिर की नींव

देश-विदेश से लोग नवरात्र के समय माता बंजारी के दर्शन करने पहुंचते हैं.

हिमालय मुखर्जी ब्यूरो चीफ रायगढ़

रायगढ़ : यह रायगढ़ से लगभग 20-25 किलोमीटर की दुरी में है बंजारी माता मंदिर रायगढ़ इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर के तालाब को ऐसा बनाया गया है जिस को ऊपर से देखने पर भारत का नक्शा दिखता है, और ये मंदिर रायगढ़ से मात्र 20 km दूर है, और छत्तीसगढ़ का एक मात्र ऐसा तालाब है। और साथ में ही छत्तीसगढ़ का वि नक्शा है सैकड़ों साल पहले बंजारों ने जिले से बाहर वन भूमि पर एक देवी की मूर्ति स्थापित की थी. समय बीतता चला गया और बंजारों का अस्तित्व भी समाप्त हो गया, लेकिन वह मूर्ति आज भी वहीं मौजूद है. जैसे-जैसे साल बीतता गया वैसे-वैसे लोगों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार वहां मंदिर का निर्माण कर लिया.

इस मंदिर को माता बंजारी के नाम से जाना जाता है. बंजारी मंदिर रायगढ़ शहर से जशपुर रोड पर लगभग एक घंटे की दूरी पर है. मुख्य मार्ग से लगे होने की वजह से बंजारी मंदिर में हर समय लोगों की भीड़ रहती है, यहां देश-विदेश से लोग नवरात्र के समय माता बंजारी के दर्शन करने पहुंचते हैं.

बंजारी मंदिर के नाम से फेमस है यह मंदिर

मंदिर के पुजारी बताते हैं कि सैकड़ों साल पहले यहां बंजारे रहते थे और उन्हीं के सपने में देवी माता ने दर्शन दिया था, जिसके बाद बंजारों ने एक देवी की स्थापना की थी. जैसे-जैसे समय बीतता गया बंजारे इस जगह से चले गए और यहां तराई माल गांव बस गया. इसके बाद तराई माल के लोगों ने यहां पूजा करना शुरू कर दिया. बंजारों की वजह से इस मंदिर का नाम बंजारी मंदिर पड़ गया और देवी माता बंजारी के नाम से फेमस हो गई.9वें दिन यहां विशेष पूजा अर्चना होती है

बंजारी माता सभी भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती है. माना जाता है कि यहां सच्चे मन से जो मांगों वो मुराद पूरी होती है. नवरात्र के 9वें दिन यहां विशेष पूजा अर्चना की जाती है. नवमी के दिन महा भंडारा का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों लोग पहुंचते हैं.बंजारों ने रखी थी मंदिर की नींव

मंदिर की देखरेख और मरम्मत का काम यहां के ट्रस्टी की ओर से किया जाता है. सैकड़ों साल से तराई माल गांव के लोग ही मंदिर में पूजा कर रहे है. मंदिर कब बना इसकी सही तिथि किसी को भी मालूम नहीं है, लेकिन यही माना जाता है कि बंजारों ने इस मंदिर की नींव रखी थी.

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