राष्ट्रीय

जवान को जेंडर चेंज कराना पड़ा भारी, नेवी ने नौकरी से निकाला

लिंग परिवर्तन कराने पर भारतीय नौसेना ने अपने एक जवान को बर्खास्त कर दिया है। उस पर सेवा नियमों के उल्लंघन का इल्जाम है। छुट्टी के दौरान अगस्त में मनीष गिरी नाम के इस नौसैनिक ने मुंबई के एक अस्पताल में अपना लिंग परिवर्तन करा लिया था।

भारतीय नौसेना ने अपने एक बयान में कहा कि भारतीय नौसेना एक नौसैनिक नाविक मनीष गिरी को सेवाओं से मुक्त करती है।

उन्हें नौसेना के नियमों के तहत ‘अब सेवा की आवश्यकता नहीं है’ खंड के तहत सेवा मुक्त किया जा रहा है। इसमें कहा गया कि इस व्यक्ति ने सेवा में शामिल होते समय अपरिवर्तनीय लिंग के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किया था मगर छुट्टी के दौरान उसने जानबूझकर अपना लिंग बदलवा लिया जो कि उसकी नियुक्ति के समय से अलग था।

गिरी की तैनाती नौसेना विभाग में विशाखापत्तनम में थी। नौसेना ने कहा कि इसने भारतीय नौसेना में नाविक के रूप रोजगार के लिए निर्धारित योग्यता और भर्ती नियमों का उल्लंघन किया है। इसमें कहा गया है कि मौजूदा सेवा नियम और विनियमन नाविक की नौकरी को जारी रखने की अनुमति नहीं देते हैं।

सात साल पहले पूर्वी नवल कमांड के मरीन इंजीनियरिंग विभाग में मनीष गिरी ने बतौर सिपाही ज्वाइन किया था। 2016 में मनीष ने विजाग में एक डॉक्टर से बात की और अपना इलाज करवाया। हालांकि इसके बाद भी महसूस हुआ कि उसके पास कोई विकल्प नहीं है इसलिए उसने बाइस दिन की छुट्टी ली और लिंग परिवर्तन सर्जरी के लिए चली गईं। सर्जरी के बाद मनीष ने अपना नाम शाबी रख लिया और विशाखापतनम के नौसेना बेस में वापस आ गई।

नौसेना का कहना है कि किसी महिला को सिपाही के तौर पर रखना नौसेना की नीतियों के खिलाफ है। बता दें कि भारत में अभी ट्रांसजेंडरों को तीनों सेनाओं में नौकरी के लिए कोई प्रावधान नहीं है। लेकिन कनाडा, इस्राइल, नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, स्वीडन और जर्मनी ने अपनी तीनों सेनाओं में ट्रांसजेंडरों को नौकरी की अनुमति दे रखी है। लेकिन अभी हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेना में ट्रांसजेंडरों की नौकरी देने पर मनाही कर दी है।

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