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अपनी पनडुब्बियों में एयर इंडिपेंडेंट प्रपल्सन सिस्टम लगाने जा रही नौसेना

भारतीय नौसेना के बेड़े का सबसे नई पनडुब्बी कल्वरी

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना को एक बड़ी ताकत मिलने जा रही है। नौसेना ऐसी टेक्नॉलजी हासिल करने जा रही है जो उसकी मारक क्षमता को कई गुना घातक बना देगी। नौसेना अपनी पनडुब्बियों में एयर इंडिपेंडेंट प्रपल्सन सिस्टम लगाने जा रही है। आइए जानते हैं इस सिस्टम के बारे में…

पनडुब्बियों को बहुत घातक बना देता है API सिस्टम

यह टेक्नॉलजी उन पनडुब्बियों को समुद्र की सतह पर आए बिना अभियान को अंजाम देने की अवधि बढ़ा देती है जो परमाणु क्षमता से लैस नहीं हैं। इस कारण दुश्मन को इन पनडुब्बियों की हरकतों के पकड़ पाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए, एआईपी युक्त पनडुब्बियों को हाइ रिस्क एरिया में लंबे समय तक पेट्रोलिंग के लिए तैनात किया जाता है।

DRDO में विकसित

बड़ी बात यह है कि चीन और पाकिस्तान की नौसेना के पास यह टेक्नॉलजी पहले से ही थी। अब भारतीय नौसेना की कल्वरी श्रेणी की पनडुब्बियों के लिए भी एआईपी टेक्नॉलजी तैयार है। इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने लार्सन ऐंड टुब्रो की मदद से विकसित किया है। इस एआईपी सिस्टम देसी पीएएफसी आधारित टेक्नॉलजी से तैयार किया गया है। इस सिस्टम से बिजली पैदा करने के लिए हाइड्रोजन और ऑक्सिजन का इस्तेमाल होता है। लार्सन ऐंड टुब्रो देसी परमाणु क्षमता युक्त पनडुब्बी बनाने में भी जुटी है।

सभी कल्वरी क्लास सबमरीन में API सिस्टम

सूत्रों के मुताबिक, भारतीय नौसेना अपनी सभी कल्वरी क्लास सबमरीन को देसी एआईपी से लैस करने की योजना पर आगे बढ़ रही है। इस काम में छह-सात साल लग सकते हैं। एआईपी सिस्टम को क्रू एरिया और इंजिन स्पेश के बीच हल एक्सटेंशन में फिट करना होता है। इस देसी सिस्टम से पनडुब्बी की संचालन क्षमता दो हफ्ते तक बढ़ सकती है।

भारतीय नौसेना की सबसे नई पनडुब्बी

भारतीय नौसेना के बेड़े का सबसे नई पनडुब्बी कल्वरी ही है। कल्वरी मुख्य रूप से फ्रांस की स्कॉर्पियन पनडुब्बियों का ही एक वर्जन है। कल्वरी पड़ोसी पाकिस्तान की नौसेना में शामिल अगोस्टा क्लास की पनडुब्बियों के मुकाबले नई पीढ़ी की है। हालांकि, पाकिस्तानी अगोस्टा पनडुब्बियों में एआईपी सिस्टम पहले से लगा है। पाकिस्तान अपने सदाबहार दोस्त चीन से आठ टाइप 093बी सबमरीन खरीद रहा है।

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