एनडीए के हरिवंश की जीत कांग्रेस के लिए बड़ा झटका

विपक्षी एकता की खुली पोल, पीएम बनने के राहुल के सपनों पर लगा ग्रहण

नई दिल्ली। राज्यसभा उपसभापति के चुनाव से कांग्रेस को सियासी जीत की उम्मीद थी। लेकिन एनडीए प्रत्याशी व जेडीयू सांसद हरिवंश ने कांग्रेस प्रत्याशी बीके हरिप्रसाद को आसानी से हराकर पार्टी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। इससे कांग्रेस के उम्मीदों और प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। साथ ही विपक्ष एकता पर भी सवाल उठ खड़े हुए हैं।
वहीं मोदी सरकार का मनोबल इससे बढ़ा हैा ऐसा इसलिए कि 26 साल बाद राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव सर्वसम्मति से न होकर मतदान से हुआ है। मतदान कराने का निर्णय कांग्रेस ने लिया लेकिन पार्टी जिस रणनीति पर काम कर रही थी उसे साकार रूप नहीं दे पाई और यह चुनाव अब उसी के लिए नुकसानदेह साबित होगा।

कांग्रेस को नहीं थी हार की उम्मीद
दरसअल, कांग्रेस एनडीए में उपजे मतभेदों का लाभ उठाना चाहती थी। महागठबंधन की आड़ में कांग्रेस शिव सेना, अकाली दल, इनेलो, बीजेडी, वाईएसआर, टीएसआर व अन्य क्षेत्रीय पार्टियों का सहयोग हासिल कर पीएम मोदी को झटका देने की योजना में थी। लेकिन कर्नाटक की तरह इस सियासी गेम को भुनाने में सोनिया और राहुल गांधी की जोड़ी सफल नहीं हुई। उल्टे पीएम मोदी-अमित शाह और नीतीश कुमार की तिगड़ी ने विपक्षी एकता को ठेंगा दिखा दिया। परिणाम यह निकला के एनडीए का प्रत्याशी आसानी से चुनाव जीत गया और एनडीए के नाराज धरे फिर से वापस लौट आने के संकेत दिए हैं।

लोकसभा चुनाव में असर पड़ना तय
राज्यसभा उपसभापति का चुनाव का संबंध सीधे तौर पर 2019 में प्रस्तावित लोकसभा चुनाव से नहीं है लेकिन इसका असर पड़ना तय है। ऐसा इसलिए कि राजनीति में विपक्षी एकता से जुड़े विभिन्न पार्टियों के नेताओं का मकसद एक है। हर हाल में हर मोर्चे पर पीएम मोदी की हार को सुनिश्चित करना। इसका संकेत गोरखपुर, फूलपुर, नूरपुर, कैराना, कर्नाटक के विधानसभा चुनावों में मिल भी चुका है। इन सभी अवसरों पर महागठबंधन के नाम पर नापाक सियासी घटनाओं को अंजाम दिया गया। इसमें विपक्षी पार्टियों को बहुत हद तक सफलता भी मिली। लेकिन लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के बाद एक पखवाड़े के अंदर दूसरी बार विपक्षी एकता को एनडीए ने ठेंगा दिखाने का काम किया है।

भाजपा उठाएगी इसका लाभ
इन सभी परिणामों को भाजपा लोकसभा चुनावों तक भुनाने का काम करेगी। भाजपा नेता इस बात का प्रचार हर सियासी मोर्चे पर करेंगे कि महागठबंधन निरर्थक प्रयास है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने तो यहां तक कह दिया है कि जन्म होने से पहले की इसकी मौत तय है। दूसरी तरफ विपक्षी एकता में सेंध लगाकर मोदी-शाह की जोड़ी ने साफ कर दिया है कि लोकसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस कोई भ्रम में न रहे। साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी के मनोबल को तोड़ने का भी काम किया।

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