छत्तीसगढ़

जयजयकार-हाहाकार वाली पत्रकारिता के बीच का रास्ता निकालने की जरूरत: अनुराधा

रायपुर : बाजार और तकनीक की चुनौतियों ने पत्रकारिता का जो चेहरा बदला है, उसके कारण पत्रकारों की जिम्मेदारियां और भूमिका बदली हैं। अब जयजयकार और हाहाकार वाली पत्रकारिता के बीच का रास्ता निकालने की जरूरत है, ताकि लोकतंत्र का जो विश्वास मीडिया पर बना है, वह और मजबूत हो सके। ये बातें बुधवार को टीवी पत्रकार अनुराधा प्रसाद ने मीडिया मंथन समारोह के उद्घाटन सत्र में कही। यह कार्यक्रम कुशाभाउ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर से सम्बद्ध पं. दीनदयाल उपाध्याय मानव अध्ययन शोधपीठ और छात्र कल्याण न्यास के संयुक्त तत्वावधान में हुए दो दिवसीय मीडिया—मंथन समारोह का उद्घाटन हुआ।
न्यूज24 चैनल की प्रबंध निदेशक अनुराधा प्रसाद ने कहा कि संघर्ष ही जीवन है और जीवन ही संघर्ष है इसलिए पत्रकारिता की नई पीढी को खुद को तरासकर आगे बढने की जरूरत है। उन्होंने अपना उदाहरण रखते हुए कहा कि जब वे पत्रकारिता में आईं तो लगा कि शायद ही सफल हो सकूँ मगर समय और चुनौतियों के अनुरूप उन्होंने खुद को तराशा और यह मुकाम हासिल किया। आज उन्हें बोर्ड रूम और न्यूज रूम में सामंजस्य बिठाना पडता है, ताकि पत्रकार और पत्रकारिता दोनों का सम्मान बचा रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. डॉ. एमएस परमार ने कहा कि पत्रकारों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सही अर्थ समझने होंगे। इतिहास और संविधान की बेहतर समझ रखने वाले पत्रकार ही अपने प्रोफेशन से सही न्याय कर सकते हैं।
समारोह के विशिष्ट अतिथि अभाविप के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक साकेत बहुगुणा ने कहा कि भारत को स्वदेशी मूल्यों और दृष्टि के साथ आगे बढना है। छात्रशक्ति ही राष्ट्रशक्ति है, इस तादात्मय को समझते हुए अखिल भारतीय विदयार्थी परिषद ने देशभर में युवाओं का ऐसा नेटवर्क तैयार किया जो रचनात्मक और सकारात्मक भूमिका में राष्ट्रवादी विचारों के साथ आगे बढ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ तथाकथित बुदिधजीवी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर देश को बांटने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन इसकी अनुमति नही दी जा सकती।
आयोजन के संयोजक तथा पं. दीनदयाल उपाध्याय मानव अध्ययन शोधपीठ के अध्यक्ष प्रवीण मैशेरी ने कहा कि हमारा विश्वविद्यालय पत्रकारिता का गुरूकुल माना जाता है और पण्डित दीनदयाल उपाध्याय ने लगभग 20 सालों तक पत्रकारिता की इसलिए उनके योगदान को चिन्हांकित करने, नए शोध आधारित विचारों को सामने लाने तथा मीडिया में आने की इच्छुक नई पीढ़ी को पं. उपाध्याय के पत्रकारीय-सिद्धांतों से परिचय कराने के उद्देश्य के साथ हमने इस दो दिवसीय मीडिया-मंथन सेमीनार किया है।
दैनिक भास्कर के संपादक शिव दुबे ने कहा कि वर्तमान में खबरों की विश्वसनीयता को बाजार से खतरा अवश्य है लेकिन इसका संतुलन साधते हुए जो पत्रकारिता करेगा, वही आगे बढ़ सकेगा। हालांकि प्रिंट माध्यम की विश्वसनीयता अब भी कायम है।
इसके पूर्व दीप प्रज्जवलन, स्वागत वंदना तथा अतिथियों के स्वागत के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कार्यक्रम का संचालन प्रखर मिश्रा ने किया। आभार प्रदर्शन प्राध्यापक नृृपेन्द्र शर्मा ने किया। कार्यक्रम में विशेष रूप से अभाविप के मध्य क्षेत्र के संगठनमंत्री प्रफुल्ल आकांत, सह—संगठनमंत्री चेतस सुखाडिया, प्रांत संगठन मंत्री मधुसूदन जोशी, माधवराव सप्रे शोध पीठ की अध्यक्ष आशा शुक्ला, कुलसचिव डॉ. गिरीश कांत पाण्डेय, डॉ. सुरेन्द्र, दैनिक पायोनियर के प्रबंध संपादक संजय शेखर, वरिष्ठ पत्रकार अनिल द्विवेदी, विभागाध्यक्ष आशुतोष कुमार मंडावी सहित विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।

Tags
advt

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.