बैकुंठपुर जिला अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही, नवजात बच्चे की हुई मौत

अंकित राजपूत :

बैकुंठपुर :

जिला अस्पताल में शुक्रवार सुबह 11 बजे एक शिशु की जन्म लेते ही डस्टबिन में गिरकर मौत हो गई। परिजन का आरोप है कि जब डिलीवरी हुई उस समय लेबर रूम में न तो कोई डॉक्टर था और न कोई नर्स। ये सभी लोग कायाकल्प योजना के तहत निरीक्षण करने आई 5 सदस्यीय टीम की खातिरदारी में व्यस्त थे।

चिरमिरी-पोड़ी की नसरीन (25) को प्रसव पीड़ा होने पर गुरुवार सुबह 4 बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय डाॅ. स्वाती बंसरिया मरीज की जांच कर रहीं थीं। नसरीन की मां अफरोज बेगम के अनुसार एक बार जांच करने के बाद दोबारा कोई देखने तक नहीं आया।

आसपास के वार्ड के लोगों ने भी बताया कि गुरुवार को रातभर महिला दर्द से चिल्लाती रही, लेकिन कोई देखने नहीं आया। हालांकि, देर शाम तक अस्पताल प्रबंधन चेकआउट करने की बात कहता रहा, लेकिन परिजन मामला दर्ज होने की बात पर अड़े रहे।

नसरीन की मां अफरोज बेगम के अनुसार सुबह 10:30 बेटी को ऐसे लेबर रूम में शिफ्ट किया, जो तैयार नहीं था। इसका उद्घाटन भी नहीं हुआ। इसे लेकर नर्स से बहस भी हुई थी। फिर भी डाॅक्टर के कहने पर हम बेटी को रूम में लेकर गए। आधे घंटे तक वहां न तो डाॅक्टर और और न नर्स पहुंची। इस बीच बच्चे का जन्म हुआ और वह सीधे डस्टबिन में गिर गया, उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

ड्यूटी पर तैनात नर्स सरस्वती पटेल के अनुसार 10:30 बजे से 11 बजे तक 6 बच्चों की डिलीवरी हुई। दूसरा लेबर रूम डिलीवरी के लिए तैयार ही नहीं है।

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