पडौसी देश कर सकता है युद्ध की शुरुआत, सावधान भारत -ज्योतिषीय विश्लेषण

अंतिम बार 26 जून 1975 को इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की

भारत वर्ष को आज तक के इतिहास में तीन बार आपातकाल की स्थिति से गुजरना पड़ा है। पहली बार 26 अक्तूबर 1962 को, दूसरी बार 3 दिसम्बर 1971 को और अंतिम बार 26 जून 1975 को इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की। आगे बढ़ने से पूर्व आईये जान लें कि वास्तव में आपातकाल होता क्या है?

आपातकाल से अभिप्राय: एक ऐसा संवैधानिक प्रावधान है जिसका प्रयोग देश में आंतरिक, बाहरी और आर्थिक रुप से खतरा उत्पन्न होने के समय किया जा सकता है। किसी भी देश को ऐसी स्थिति का सामना क्यों करना पड़ता है।

संविधान का निर्माण करने वाले विद्वजनों ने इस प्रावधान का निर्माण यह सोच कर किया था कि यदि किसी समय कोई शत्रु देश हमारे देश पर हमला कर दें, तो ऐसे में देश को बचाने के लिए हर प्रकार के निर्णय लेने के लिए केंद्र सरकार स्वतंत्र हों, उसे किसी भी संवैधानिक औपचारिकता का सामना न करना पड़े।

यह प्रावधान संविधान में देश को बाहरी शक्तियों से बचाने और मुश्किल समय से देश को बाहर लाने के लिए किया गया है। आपात स्थितियों से निपटने के लिए सारी शक्तियां केंद्र सरकार के पास होनी चाहिए।

इसी विचार से संविधान में आपातकाल की घोषणा का प्रावधान रखा गया। भावी राष्ट्रपति के द्वारा आपातकाल यदि घोषित कर दिया जाता है तो केंद्र सरकार प्रत्येक निर्णय लेने का अधिकार रखती है।

संविधान के अनुसार तीन तरह के आपातकाल हो सकते हैं-

१ पहला राष्ट्रीय स्तर पर जिसे राष्ट्रीय आपातकाल का नाम दिया गया-

यह समय देश के लिए युद्ध, बाहरी आक्रमण और देश सुरक्षा से जुड़ी हो सकती है। इस स्थिति में केंद्र सरकार के पास असीमित अधिकार आ जाते हैं और देश के नागरीकों से सारे अधिकार छिन्न लिए जाते हैं। यह आपातकाल लागू करने के लिए भावी राष्ट्रपति की सहमति आवश्यक है। यह अभी तक तीन बार लागू किया जा चुका है।

I) प्रथम बार संकटकालीन घोषणा 26 अक्तूबर 1962 से लेकर 10 जनवरी 1968 तक आपातकाल रहा। यह समय भारत पर चीन देश के आक्रमण का समय था।

2) दूसरी बार 3 दिसंबर, 1971 को पाकिस्तान द्वारा भारत पर आक्रमण किये जाने पर संकटकालीन स्थिति की घोषणा कर दी गई।

3) तीसरी बार 26 जून, 1975 को आंतरिक अव्यवस्था के नाम पर संकटकाल की घोषणा की गई। जून 1975 में घोषित संकटकाल 21 मार्च, 1977 को समाप्त कर दिया गया। इसके बाद से अभी तक कोई आपातकाल घोषित नहीं किया गया है।

2 दूसरा राज्य स्तर पर आपातकाल जिसे राष्ट्रपति शासन का नाम दिया गया। यह आपातकाल सिर्फ किसी राज्य विशेष में लागू किया जा सकता है-

यह इंमरजेंसी समय समय पर राज्यों की व्यवस्था बनाए रखने के लिए लागू की जाती रही है। राज्य विशेष की राजनैतिक और संवैधानिक व्यवस्था के फेल होने पर यह आपातकाल लागू किया जाता है। इसकी अवधि 2 माह से लेकर अधिक से अधिक 3 साल तक की ही हो सकती है।

3 आर्थिक आपातकाल जो देश की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है-

यदि कभी देश की अर्थव्यवस्था संकट में फंस जाती हैं और वस्तुओं के मूल्यों पर नियंत्रण रखने में असफल रहती है तो आर्थिक आपातकाल का नाम दिया जाता है। इस समय में सरकार दीवालिया घोषित हो जाती है। उपरोक्त तीनों प्रकारों में से अब तक प्रथम दो अभी तक लागू हो चुकी है।

ज्योतिष के अनुसार आईये देखें कि कौन से ज्योतिषीय योग देश में आपातकाल की स्थिति का निर्माण करने का कार्य करते हैं और आने वाले वर्ष में क्या देश में आपातकाल लागू हो सकता है-
भारत देश की कुंड्ली वॄषभ लग्न और कर्क राशि की हैं।

भारत देश की कुंड्ली
15 -08-1947, 00:00, दिल्ली

भारत वर्ष की कुंड्ली वॄषभ लग्न, कर्क राशि एवं पुष्य नक्षत्र की है। जन्म लग्न में राहु विराजमान है, सप्तम में केतु स्थित है। कुंड्ली की तीसरा भाव छ: ग्रहों के प्रभाव क्षेत्र में है। भाग्येश और कर्मेश शनि तृतीय भाव में स्थित है।

पंचमेश बुध भी अपने से एकादश भाव में स्थित

इस प्रकार भाग्य भाव को भावेश की दृष्टि प्राप्त होने से भाग्य भाव बली हो रहा है। पंचमेश बुध भी अपने से एकादश भाव में स्थित हैं। यह जनसंख्या की अधिकता का सूचक है। शनि-चंद्र का एक साथ होना और राशिश चंद्र का शनि के पुष्य नक्षत्र में होना, यहां के आमजन में आत्मविश्वास की कमी का द्योतक है।

कुंड्ली के तीसरे भाव में तीनों त्रिकोणेश और सप्तमेश के अतिरिक्त सभी केंद्रेश एक साथ युति संबंध में स्थित है। इसके अतिरिक्त केतु का मंगल की राशि में होने के प्रभावस्वरुप सूक्ष्म तकनीकी क्षेत्रों में भारत को अग्रणीय रखे हुए है।

अष्ट्मेश का छ्ठे भाव में होना विपरीत राज योग

यही वजह है कि भारत के साफ्ट्वेयर इंजीनियर्स विश्व में अपनी योग्यता की धाक जमाए हुए है। अष्ट्मेश का छ्ठे भाव में होना विपरीत राज योग बना रहा है। पराक्रम भाव में सूर्य, चंद्र, शनि, शुक्र और बुध का एक साथ होना पंचग्रही योग निर्मित कर रहा है। भारत देश की स्वतंत्रता के समय बुध की महादशा थी।

उस समय की कुंडली में लग्न मे राहु, द्वितीय कुटुंब भााव में मंगल, तृतीय पराक्रम भाव में सूर्य, चंद्र, बुध, शुक्र, शनि ये पांच ग्रह बैठकर पंचग्रही योग बना रहे हैं। इसके अतिरिक्त छठे ऋण, रोग और शत्रु भाव में गुरु और सातवें पत्नी, व्यवसाय, स्त्री भाव में केतु बैठे हुए हैं। उस समय आश्लेषा नक्षत्र था और बुध की महादशा चल रही थी।

भारत देश का तीसरा भाव अत्यंत पीडित

द्वितीय मारकेश और पराक्रम के कारक ग्रह मंगल का दूसरे भाव में होने के कारण, भारत देश के अपने पडोसियों से संबंध सदैव तनावपूर्ण रहे है। भारत देश का तीसरा भाव अत्यंत पीडित हैं यह भारत की सीमाओं पर तनाव दर्शाता है।

इस समय भारत की कुंड्ली में चंद्र की महादशा में गुरु की अंतर्द्शा

इस समय भारत की कुंड्ली में चंद्र की महादशा में गुरु की अंतर्द्शा चल रही है। अगस्त 2018 से गुरु की यह अंतर्द्शा प्रारम्भ हुई है, जो दिसम्बर 2019 तक रहेगी। वृषभ लग्न के लिए अंतर्द्शानाथ गुरु आयेश और अष्टमेश होते है, और विपरीत राजयोग बनाते हुए छ्ठे भाव में स्थित है। अत: इस अवधि में भारत की आर्थिक स्थिति में सुधार होंगे। साथ ही कुछ गंभीर बीमारियां के बड़ी तादाद में फैलने के योग बनते हैं।

प्रथम बार आपातकाल के समय (26 अक्तूबर 1962)- शनि में राहु की दशा चल रही थी। आपातकाल के समय मंगल राहु के साथ कर्क राशि में नीचस्थ थे, केतु-शनि की नवम भाव में युति हो रही थी, अर्थात चार सबसे बड़े ग्रहों का प्रभाव एक दूसरे पर प्रत्यक्ष था, मंगल-राहु और केतु-शनि समसप्तक योग में थे। जन्म राशि अत्यंत पीडित थे।

दूसरी बार आपातकाल के समय- बुध में शुक्र की दशा थी। शनि-चंद्र लग्न में, राहु-मंगल लग्न भाव को दृष्टि दे रहे थे। मंगल शनि की राशि में थे, राहु भी शनि की राशि में थे। गुरु लग्न भाव को देख रहे थे, अत: युद्ध पर जल्द ही विजय प्राप्त कर ली गई। जन्म लग्न और जन्म राशि दोनों इस समय बुरी तरह पीडित थे।

तीसरी बार आपातकाल घोषित होने के समय – बुध में राहु की दशा थी। आपातकाल के दौरान लग्न राहु/केतु अक्ष में था, जन्म राशि कर्क पर राहु, मंगल और गुरु का प्रभाव था। दूसरे भाव में सूर्य-शनि की युति हो रही थी।

अभिमन्यु की सफल वापसी

०६ फरवरी से लेकर २० मार्च के मध्य २०१९ में एक बार फिर वही स्थिति बनी थी, जिसके फलस्वरुप पुलवामा अटैक के बाद सर्जिकल स्ट्राईक २ के गई, और पाकिस्तान के साथ युद्ध की स्थिति बनी थी, जिसका अंत अभिमन्यु की सफल वापसी के रुप में रहा। इसका फलादेश हमने जनवरी 2019 में प्रकाशित एक आलेख में पूर्व ही कर दिया था।

वही स्थिति वर्तमान में 09 अगस्त 2019 से लेकर 05 नवम्बर 2019 के मध्य एक बार फिर बन रही है। इस अवधि में गुरु, शनि, केतु की युति भारत की कुंडली के अष्टम भाव पर हो रही है, इस समय मंगल का गोचर भारत के पंचम भाव पर होगा वहां से अष्टम भाव में गोचर कर रहे शनि-केतु पीडित होंगे और एकादश भाव के साथ साथ द्वादश भाव भी व्यय के योग बना रहा है।

इस समय राहु द्वितीय भाव पर गोचरस्थ हो एतिहासिक मुद्दों के विवादित होने के योग बना रहे है। मार्च 2020 में शनि-गुरु की युति मकर राशि में एक बार फिर से पडौसी देश चीन के साथ युद्ध की स्थिति उत्पन्न कर सकती है।

सीमाओं पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी समझदारी

कुल मिलाकर अगस्त 2019 से लेकर मार्च 2020 तक का समय भारत वर्ष के लिए कष्टकारी और कूटनीति से काम लेकर, सावधानी बरतने का है। इस अवधि में हमारी सीमाओं की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है, सीमाओं पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी समझदारी होगी।

यह योग बाहरी आक्रमण और आंतरीक कलह दोनों की स्थिति दर्शा रहा है। पडोसी देश सीमा क्षेत्रों पर युद्ध का दबाव बनाकर आक्रमण की स्थिति उत्पन्न कर सकते हैं। सावधानी रखने से स्थिति को टाला जा सकता है। इस समय में देश में आंतरिक कलह की स्थिति बन सकती है, धार्मिक दंगे देश की कानून व्यवस्था को हानि पहुंचा सकते हैं।

2 कुंड्ली / दशा
26 अक्तूबर 1962, दिल्ली

3 कुंड्ली / दशा

03 दिसम्बर 1971, दिल्ली

4 कुंड्ली / दशा

26 जून 1975, दिल्ली

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव 8178677715,

9811598848

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