अंतर्राष्ट्रीय

नेपाल ने भारत के साथ काम करते रहने की जरूरत पर बल दिया

कहा- आत्मसम्मान और संप्रभुता के साथ पड़ोसी देशों से रिश्ते बनाना मकसद

भारत के साथ मजबूत संबंधों की वकालत करते हुए नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार ने चीन के साथ भी रिश्ते बनाने की पैरवी की। उन्होंने दोनों देशों चीन और नेपाल के बीच बढ़ रहे मित्राना संबंधों का बचाव करते हुए कहा कि उनका देश आत्मसम्मान और संप्रभुता के आधार पर पड़ोसी देशों से रिश्ते बनाना चाहता है।

वही उन्होंने जोर दिया, यह कैसे संभव है कि एक पड़ोसी देश के साथ हमारे संबंध हों और दूसरे देश के साथ नहीं हों। माधव कुमार ने भारत-नेपाल संबंधों को और करीबी व गर्मजोशी भरा बनाने के लिए लगातार काम करते रहने की जरूरत पर भी बल दिया।

माधव कुमार ने कहा कि भारत एक बड़ा देश है, जहां से खासा निवेश हो सकता है। नेपाल भारत से कारोबार में रियायत चाहता है। भारत-नेपाल के संबंधों में खटास का कारण पूछे जाने पर नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल की यात्रा के दौरान जब संसद को संबोधित किया था, तब इसका नेपाल के जनमानस पर गहरा प्रभाव पड़ा।

उन्होंने कहा, तब दोनों देशों के रिश्तों को नई गति मिली लेकिन यह स्थिति लंबे समय तक नहीं रही और मधेसी मुद्दे पर घेराबंदी के कारण संबंध प्रभावित हुए। उन्होंने हालांकि कहा कि इन बातों का जिक्र करने की बजाए दोनों देशों को आगे बढ़ने की जरूरत है।

माधव नेपाल का आकलन है कि कुछ समय पहले हुई प्रधानमंत्री मोदी की नेपाल यात्रा के बाद चीजें फिर से पटरी पर लौटने लगी हैं और राजनीतिक नेतृत्व को इस दिशा में सतत प्रयास करने की जरूरत है।

चीन-नेपाल रिश्तों पर एक वर्ग की चिंता के बारे में उन्होंने कहा कि चीन के साथ नेपाल का अगर सड़क, रेल या वायु संपर्क बढ़ता है और व्यापार बढ़ता है तो इससे भारत को कोई नुकसान नहीं होगा।

नेपाल के पूर्व पीएम ने कहा कि नेपाल के व्यापारियों को चीन के ग्वानजाऊ क्षेत्र से सामान लाने के लिए कोलकाता बंदरगाह का उपयोग करना पड़ता है और वहां अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है।

भारत से है नेपाल को काफी उम्मीदें

उनका तर्क था कि चीन से सीधे रेल, सड़क संपर्क से नेपाल को फायदा होगा। भारत और नेपाल के बीच मजबूत कारोबारी संबंधों की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि भारत पनबिजली के क्षेत्र में बहुत सहयोग कर सकता है।

उन्होंने कहा, नेपाल में पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं। भारत आधारभूत ढांचा क्षेत्र के विकास में उसे सहयोग कर सकता है। उन्होंने चिंता जताई कि कई भारतीय परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं होतीं हैं।

कोई भी राष्ट्र नेपाल को अपना सेटेलाइट न समझे

नेपाल के पूर्व पीएम ने कहा कि हमने कभी भी भारत के खिलाफ न तो चीन कार्ड का इस्तेमाल किया है और न ही चीन के खिलाफ भारत कार्ड का।

उन्होंने कहा कि नेपाल के आंतरिक मामलों को न तो कोई निर्देशित करे और न ही उसे कोई अपना सैटेलाइट समझे। उन्होंने कहा, भारत-नेपाल रिश्ते ऐसे होने चाहिए जहां दोनों के लिए फायदा हो।

नेपाल कभी भी भारत के हितों के खिलाफ नहीं सोच सकता। ऐसा करने से उसे कोई फायदा नहीं होगा। भारत एक बड़ा पड़ोसी देश है, जिसके साथ हमारे पुराने भावनात्मक संबंध रहे हैं।

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