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मोदी सरकार के सामने नया संकट, बेघर-बेदर और बेरोजगार होने जा रहे हैं इतने लाख लोग!

कुवैत की सरकार ने प्रावसी नागरिक कोटा बिल पारित कर दिया है।

नई दिल्ली। मोदी सरकार के सामने एक नया संकट सामने आ सकता है। यह संकट के बादलों का यह गुबार खाड़ी देशों की ओर से उड़ा है।

खबर मिली है कि कुवैत में रह रहे प्रवासी भारतीयों में से अधिकांश को भारत लौटना पड़ सकता है। क्यों कि कुवैत की सरकार ने प्रावसी नागरिक कोटा बिल पारित कर दिया है।

यह बात भी उठ रही है कि अगर कुवैत सरकार इस मसौदे पर अड़ी रही तो वहां की बहुत से सुविधाएं बंद हो जायेंगी। क्योंकि कुवैत के ज्यादातर विभागों में भारतीय नागरिक ही काम कर रहे हैं।

भारतीय नागरिक कुवैत की अर्थव्यवस्था की रीढ हैं। अगर भारतीय प्रवासी नागरिकों पर कोटा कानून लागू किया तो खुद कुवैत सरकार के लिए संकट खड़ा हो सकता है।

प्रवासी कोटा बिल के मसौदे को मंजूरी

बहरहाल, कुवैत में प्रवासी कोटा बिल के मसौदे को मंजूरी मिल गई है। इसके नतीजतन 8 लाख भारतीयों को खाड़ी देश को छोड़ना पड़ सकता है।

कानून के मुताबिक कुवैत की कुल जनसंख्या में भारतीयों की आबादी 15 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती है। अभी वहां करीब 15 लाख भारतीय रह रहे हैं।

एक मीडिया रिपोर्ट में यह बात कही गई। कुवैत की मौजूदा कुल आबादी 43 लाख है। इनमें कुवैतियों की आबादी 13 लाख है, जबकि प्रवासियों की संख्या 30 लाख है।

गल्फ न्यूज की रिपोर्ट में रविवार को कहा गया कि कुवैत की नैशनल असेंबली की कानूनी और विधायी समिति द्वारा बिल के मसौदे को मंजूरी दी गई।

बिल के मुताबिक, भारतीयों की संख्या कुल आबादी के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। इसके कारण 8 लाख भारतीयों को कुवैत छोड़ना पड़ सकता है, क्योंकि भारतीय समुदाय की बड़ी आबादी है, जो 14.5 लाख है।

सरकारी अधिकारियों के बीच बयानबाजी जोर पकड़ता जा रहा

गल्फ न्यूज के अनुसार, कोरोना वायरस महामारी के बाद कुवैत में विदेशियों की संख्या कम करने को लेकर सांसदों और सरकारी अधिकारियों के बीच बयानबाजी जोर पकड़ता जा रहा है।

पिछले महीने कुवैत के प्रधानमंत्री शेख सबा अल खालिद अल सबा ने प्रवासियों की संख्या 70 प्रतिशत से घटाकर आबादी का 30 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया था।

भारतीय दूतावास ने 2009 में इंडियन वर्कर्स वेलफेयर सेंटर की स्थापना की थी जहां मजदूरों की शिकायतों के लिए सुविधा दी गई थी और मुश्किल में फंसे घरेलू कर्मियों के लिए रहने की व्यवस्था की गई थी।

साथ ही काम के लिए किए गए समझौते को अटेस्ट करने की व्यवस्था, 24 घंटे टोल फ्री टेलिफोन हेल्पलाइन, मुफ्त का कानूनी सलाह का क्लिनिक और भारतीयों को होने वाली मुश्किलों के लिए हेल्पडेस्क बनाया गया था।

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