राष्ट्रीय

पुराने मामले में दर्ज हो सकती है नई एफआईआर, बशर्ते नए तथ्य आएं सामने

नई दिल्ली। अगर किसी मामले में कोई एफआइआर कोर्ट में रद्द कर दी जाती थी, तो उसी मामले में नई एफआईआर दर्ज नहीं होती थी। नई एफआईआर दर्ज भी की जाती थी तो उसे अमान्य ही माना जाता था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से साफ हो गया है कि अगर नए तथ्य सामने आते हैं, तो एक ही केस में दो या कई बार एफआईआर दर्ज की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एनवी रमना और एम शंतनागौदार की बेंच ने पटना हाईकोर्ट के एक फैसले को रद करते हुए कहा है कि एक ही केस में पहली शिकायत खारिज होने पर दोबारा एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। खबरों के मुताबिक, सिवान की डॉ. ईरा सिन्हा ने 30 मई 2006 को एक बायोकैमेस्ट्री एनालाईजर मशीन 7 लाख रुपए में लोगोटेक कंपनी से खरीदी थी। लेकिन मशीन ठीक से काम नहीं कर रही थी। कंपनी ने मशीन बदलने से इनकार कर दिया तो ईरा सिन्हा ने 24 मार्च 2008 को एफआईआर दर्ज करा दी। कंपनी ने इसके खिलाफ पटना हाइकोर्ट में याचिका दायर की जिसने एफआईआर रद्द कर दी।

इसके बाद महिला डॉक्टर व पति ने मशीन की निर्माता कंपनी से इटली में संपर्क किया। कंपनी के सर्विस एक्सपर्ट ने मुआयना किया तो पाया कि डुप्लीकेट पार्ट लगाकर मशीन को बेचा गया था। फिर महिला चिकित्सक ने 5 अगस्त 2012 को दोबारा कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। हाइकोर्ट ने दूसरी एफआईआर को भी खारिज कर दिया। इस निर्णय को महिला डॉक्टर ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई थी।

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