दो टूक (श्याम वेताल) : भूपेश बघेल का नया अवतार

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के बाद जिस समय राज्य की कमान भूपेश बघेल को दी जा रही थी उस समय कई लोगों का कहना था कि कांग्रेस पार्टी मुख्यमंत्री पद के लिए ठीक व्यक्ति का चुनाव नहीं कर रही है. इनमें दूसरे दलों के साथ सामान्य लोग भी शामिल थे. सच्चाई तो यह है कि कांग्रेस पार्टी के अंदर भी कुछ लोग भूपेश बघेल के नाम पर सहमत नहीं थे. भूपेश बघेल के नाम पर नाक – भौं सिकोड़ने वालों का कहना था कि वे एरोगेंट (हठी), एग्रेसिव (गुस्सैल) और शार्ट टेम्पर्ड (तुनकमिजाज) व्यक्ति हैं. जबकि ऐसे महत्वपूर्ण पद पर शांत स्वभाव का नेता होना चाहिए.

खैर, कांग्रेस हाईकमान ने कई दौर की बैठकों के बाद भूपेश बघेल को ही चुना और छत्तीसगढ़ की बागडोर उन्हें थमा दी. मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद भी भूपेश बघेल के नाम पर असहमत लोगों की खुसर – पुसर नहीं थमी. कहने लगे कि बदलाव का नारा लेकर आए भूपेश बदले की भावना से काम करेंगे यह भी नहीं देखेंगे कि वह उनका राजनीतिक विरोधी है या सामान्य विरोधी. विवेक से निर्णय नहीं ले सकेंगे.

कहा गया है कि “मुंडे – मुंडे मतिर्भिन्न:” अर्थात हर व्यक्ति की समझ अलग होती है लेकिन प्रत्यक्ष में जो दिख रहा है उससे ऐसा लगता है कि छत्तीसगढ़ को एक योग्य शासक मिला है. जो राज्य के साथ न केवल न्याय करेगा बल्कि इसे विकास की बुलंदियों पर भी ले जाएगा. प्रशासनिक अधिकारियों पर अंकुश रखते हुए उनसे राज्य हित में फैसले भी करवाएगा. रमन शासनकाल में जो गलत कार्य हुए या जिन अधिकारियों ने नियमों के विरुद्ध जाकर मनमानी की है उसे उजागर करना प्रतिशोध नहीं है. इसके जरिए अपने अधीन काम कर रहे प्रशासनिक अधिकारियों को एक संदेश देना भी है.

जहां तक भूपेश बघेल को एरोगेंट एग्रेसिव और शार्ट टेम्पर्ड कहने वालों का प्रश्न है, वे आज के भूपेश बघेल को जाकर देखें तो उनका नजरिया ही बदल जाएगा. भूपेश दिनभर व्यस्त रहते हैं, कई कार्यक्रमों में शिरकत करते हैं, अधिकारियों के साथ बैठक करते हैं, हर किसी से मुलाकात के लिए तैयार रहते हैं, मिलने वालों से हंसकर मिलते हैं, बात करते हैं और उनकी बातें सुनते भी हैं. लगातार लोगों की आवाजाही से अधिकारी और स्टाफ के लोग भले ही ऊब जाएं लेकिन इस राजनेता के चेहरे पर शिकन नहीं होती. अपनी प्राकृतिक जरूरतों के लिए भी उन्हें समय चुराना पड़ता है. भूख – प्यास से तो उन्होंने समझौता ही कर लिया है.

भूपेश बघेल को नए अवतार में देखकर यह बात आसानी से समझी जा सकती है कि उनके अंदर राज्य को सुशासन देने का जज्बा है. भ्रष्टाचार पर पूरा कंट्रोल करने की मंशा है और अभिनव विकास के जरिए नवा छत्तीसगढ़ गढ़ने का संकल्प है. भविष्य में क्या होगा कोई नहीं बता सकता लेकिन यह तय है यदि भूपेश तमाम चुनौतियों का मुकाबला करते हुए आज जैसे ही बने रहे तो उनकी हर मुराद जरूर पूरी होगी और छत्तीसगढ़ की जनता के लिए और प्रिय नेता बन जाएंगे.

अब अगर आज के भूपेश को देखकर भी कुछ लोग पूर्वाग्रह पाल कर उनकी मुखालफत करेंगे तो वही गीत याद आता है. “कुछ तो लोग कहेंगे. लोगों का काम है कहना. छोड़ो बेकार की बातों में कहीं बीत ना जाए रैना”.

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