बढ़ते कदम की नई पहल, दरवेश सेवा कर मुख्यधारा से जोडऩा

रायपुर: जैसा कि हम सभी जानते है कि इस संसार को अदृश्य शक्तियां चला रही है। जिन्हें हम ईश्वर, अल्लाह, जीसस, गुरूनानक आदि नामों से जानते हैं, इस संसार में हर किसी का जन्म अपने पूर्व जन्मों के कर्मो के हिसाब से होता हैं। कुदरत की एक ऐसी ही व्यवस्था हंै, हमारे आसपास रहने वाले विक्षिप्तजन। जिन्हें ना तो गर्मी, बारिश की चिंता हैं, और ना ही भूख, प्यास की, ना ही इनके पास कोई परिवार है, कुदरत के मारे यह विक्षिप्तजन सिर्फ अपनी नीरस जिंदगी जी रहे हैं। समाज से उपेक्षित इन विक्षिप्तों के बारे में सोचा रायपुर की सामाजिक संस्था बढ़ते कदम ने।
बढ़ते कदम एक ऐसी संस्था है जो 12 वर्षो से “दुआ करने से बेहतर है किसी की मदद करनाÓÓ इस पंचवाक्य को आधार मानकर समाज सेवा की विभिन्न सेवाओं का सफलतापूर्वक संचालन कर रही हैं। इनमें संजीवनी वृद्धाश्रम, रोटी, कपड़ा और दवादान, शरीरदान एवं नेत्रदान, गौशाला, एम्बुलेंस सेवा आदि अनेक कार्य सम्मिलित है। बढ़ते कदम संस्था के संस्थापक स्व. अनिल गुरूबक्षाणी जी (गुरूजी) की पुण्यतिथि के अवसर पर पिछले वर्ष 14 जुलाई 16 को संस्था ने एक नया सेवा कार्य प्रारभ किया “मुझे भी जीने दोÓÓ (दरवेश सेवा)। इस अतिमहत्वपूर्ण सेवा की जिम्मेदारी संभाली बढ़ते कदम संस्था के कर्मठ सदस्य सुंदर बजाज, सुनील नारवानी, राजू झामनानी, मनोज लक्ष्वानी। सदस्यों ने इस प्रोजेक्ट में बहुत मेहनत करके शहर के विभिन्न स्थानों पर घुमकर 16 विक्षिप्तों को चिहिंत किया और आमजन इन लोगो को पागल, विक्षिप्त, सनकी और कई नामों से पुकारती है, संस्था ने इन्हें नाम दिया ‘दरवेश’।
प्रभारी जब इन दरवेशों को शहर में घूमकर इन्हें चिहिंत कर रही थे, तो इनकी मेहनत रंग लाई और दरवेशों की संख्या बढ़ती गई और शहर के विभिन्न स्थानों श्यामनगर, न्यू राजेंद्र नगर, महावीर नगर, मठपुरैना, टाटीबंध, अग्रसेन चौक, नर्मदापारा, श्रीनगर, मोतीबाग चौक, पंडरी में येे दरवेश गंदगी में बैठे रहते थे और गंदगी से ही दूसरो का फेंका हुआ गंदा खाना खाते थे एवं कई महीनों से एक ही गंदे मैले कपड़े पहने हुए थे। प्रभारियों ने योजना की शुरूआत दरवेशों को भोजन देने से की। रोजाना भोजन देते समय उन्हें उस गंदगी सें हटाकर साफ जगह में बैठाया जाता है और उस साफ स्थान पर भोजन दिया है।
प्रारंभ में सेवा के प्रभारियों को इन दरवेशों से बहुत परेशानी हुई, जैसे पत्थर से मारना, गंदगी फेंकना, गाली देना। लेकिन बाद में ये सदस्यों को पहचानने लगे, इसका सकारात्मक परिणाम यह निकला कि वे दरवेश अब गंदी स्थानों में बैठना और वहां से दूषित भोजन उठाना बंद कर दिया एवं रोजाना उस साफ जगह पर ही सदस्यों का इंतजार करते हैं और धीरे-धीरे वे सदस्यों को पहचानने लगे। सबसे खास बात यह रही की किस्मत के मारे इन दरवेशों में बहुत से दरवेश शिक्षित है और संस्था की योजना अनुसार उनके मानसिकता में परिवर्तन होने लगा। संस्था ने दरवेशों की सेवा के लिए एक बैटरी चलित वाहन खरीदा। संस्था ने इस वाहन का नाम रखा “दरवेश रथÓÓ। यह वाहन खरीदने का उद्देश्य यह था दरवेशों को समय पर भोजन एवं मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो सके।
भोजन वितरण करने के साथ-साथ सदस्यों ने उनकी उनकी मूलभूत आवश्यकताओं जैसे शारीरिक साफ -सफाई पर ध्यान दिया और उनकी माह में एक बार कटिंग, शेविंग, साप्ताहिक कपड़े बदलना त्यौहार के मौके पर उन्हें नए कपड़े अपने हाथों से पहनाते है एवं मिठाई खिलाई जाती है जिससे उन्हें अपनेपन का एहसास होने लगा है। संस्था के अध्यक्ष दीपक कुकरेजा ने बताया कि दरवेश सेवा की इस प्रोजेक्ट को शुरू करने के पीछे बढ़ते कदम के संस्थापक स्व. अनिल गुरूबक्षाणी (गुरूजी) का सपना था कि शहर में घूमने वाले विक्षिप्तों की सेवा की जाए, जिससे उनका मानसिक परिवर्तन हो और वे विक्षिप्त जीवन की मुख्यधारा में लौट आए। इस योजना के सकारात्मक निष्कर्ष भी निकल रहा हैं, संस्था द्वारा भविष्य में मुख्यधारा में लौट आए, इन दरवेशों के निवास एवं विकास के लिए एक स्थायी आश्रम की स्थापना करने का भी योजना हैं। दीपक कुकरेजा ने बताया कि संस्था के सदस्यों के घर में किसी भी प्रकार का कोई कार्यक्रम होता है तो उनके घर से ही इन दरवेशों के लिए भोजन की व्यवस्था की जाती है एवं शहर के नागरिकों से बढ़ते कदम संस्था विनती करती है आप भी अपने घरों में यदि कोई कार्यक्रम होता है तो शहर इन दरवेशों के लिए भोजन की व्यवस्था करके संस्था का सहयोग करें ।

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