आतंकी संगठनों का नया हथियार, कश्मीरी युवाओं को लुभाने के लिए ‘हनी ट्रैप’ का कर रहे इस्तेमाल: अधिकारी

श्रीनगर।

पाकिस्तानी आतंकी संगठन कश्मीर घाटी में युवाओं को आतंकवाद की तरफ खींचने के लिए अब ‘हनी ट्रैप’ का सहारा ले रहे हैं। आतंकी संगठन खूबसूरत महिलाओं के जरिए युवाओं को लुभा रहे हैं और जाल में फंसने वाले युवाओं का इस्तेमाल हथियारों को एक जगह से दूसरे जगह पहुंचाने या घुसपैठ करने वाले आतंकियों के लिए गाइड के तौर पर कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने यह खुलासा किया है।

सोशल मीडिया पर हनी ट्रैप के लिए कई अकाउंट

अधिकारियों ने बताया कि खुफिया सूचनाओं के आधार पर करीब 2 हफ्ते पहले 17 नवंबर को सईद शाजिया नाम की एक महिला को बांदीपोरा से गिरफ्तार किया गया। लड़की की उम्र 30-32 वर्ष है। फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसी सोशल नेटवर्किंग साइटों पर महिला के कई अकाउंट्स थे, जिसे घाटी के तमाम युवा फॉलो करते थे।

मुलाकात का लालच देकर युवाओं को फांसती हैं
केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी पिछले कई महीनों से शाजिया द्वारा इस्तेमाल किए गए इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) अड्रेस पर नजर बनाए हुए थे। अधिकारियों ने बताया कि वह युवाओं से चैट किया करती थी और उन्हें मुलाकात का वादा कर लुभाती थी। वह युवाओं से वादा करती थी कि जो भी उसके ‘कंसाइनमेंट’ को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाएगा, उससे वह मुलाकात करेगी।

शाजिया पुलिस विभाग के कुछ अधिकारियों के भी संपर्क में थी, लेकिन पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह सामान्य ‘डबल-क्रॉस’ का मामला है क्योंकि वह सीमापार के अपने हैंडलर्स से जवानों के मूवमेंट जैसी जानकारी दिया करती थी, जो ‘बहुत ज्यादा संवेदनशील’ सूचना नहीं है।

हनी ट्रैप के काम में घाटी की कई महिलाएं सक्रिय
पूछताछ के दौरान उसने जांचकर्ताओं को बताया कि घाटी में कई अन्य महिलाएं भी पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के लिए काम कर रही हैं। उन्हें युवाओं को आतंकवाद की तरफ खींचने के लिए लालच देने का काम दिया गया है।

कुछ महिलाएं खुद कर रहीं हथियारों की तस्करी

शाजिया की गिरफ्तारी से एक हफ्ते पहले जम्मू और कश्मीर पुलिस ने आसिया जान (28) को बांदीपोरा शहर के बाहरी इलाके लवाइपोरा से 20 ग्रेनेडों के साथ गिरफ्तार किया था। पुलिस को सूचना मिली थी कि आतंकी शहर में हथियारों और गोला-बारूद की तस्करी करने की कोशिश में हैं। पुलिस ने आसिया के कब्जे से ग्रेनेडों के अलावा बड़ी मात्रा में बारूद भी जब्त किया।

अमरनाथ हमले में शामिल आतंकियों को की थी हथियारों की सप्लाइ

पिछले साल सितंबर में पुलिस ने घाटी में लश्कर-ए-तैयबा के चीफ कमांडर अबु इस्माइल और छोटा कासिम को ढेर किया था। दोनों पिछले साल अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले में शामिल थे, जिसमें 8 तीर्थयात्रियों की मौत हुई थी। इसी मामले की जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने आसिया शाजिया की निगरानी शुरू की।

पिछले साल मुठभेड़ के बाद शाजिया का मिला सुराग

श्रीनगर सिटी के बाहरी इलाके में हुई मुठभेड़ की जगह से कुछ दस्तावेज और सामान जब्त किए गए थे, जिससे संकेत मिला कि उत्तरी कश्मीर की एक अज्ञात महिला इन दोनों आतंकियों को हथियार और गोला-बारूद सप्लाइ करने में शामिल थी। इस साल अप्रैल में, उस महिला की पहचान सईद शाजिया के तौर पर हुई। उसकी सोशल मीडिया पर गतिविधियों पर सुरक्षाबलों ने नजर रखनी शुरू कर दी। जांच में पता चला कि उसे सीमापार से निर्देश मिल रहे थे कि वह अपने हुस्न का इस्तेमाल करके युवाओं को आतंकवाद की तरफ आकर्षित करे।

पाकिस्तानी आतंकियों के भी संपर्क में थी शाजिया

शाजिया लगातार जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शेरवान उर्फ अली के संपर्क में थी। अली ने ही उसका परिचय पाकिस्तानी आतंकियों सुफियान और खासिम खान गौरी से कराया था। बाद में वह जैश-ए-मोहम्मद के लिए ओवरग्राउंड वर्कर के तौर पर काम करने लगी। वह घाटी में हथियारों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम कराने लगी।

स्पेशल पुलिस अधिकारी शाजिया तक पहुंचाता था सूचनाएं

शाजिया की गिरफ्तारी से पहले पुलिस ने हंदवाड़ा के रहने वाले एक स्पेशल पुलिस ऑफिसर को उठा लिया। उसने शाजिया को यह जानकारी दे दी थी कि उसके फोन की निगरानी की जा रही है। उस स्पेशल पुलिस अधिकारी की पहचान इरफान के तौर पर हुई जो शाजिया तक सूचनाएं पहुंचाया करता था।
शाजिया को रणबीर पैनल कोड और ऑर्म्स ऐक्ट की अलग-अलग धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है।

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