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जैश-ए-मोहम्‍मद के सरगना अजहर मसूद की मौत की खबर

इस्लामाबाद। आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर की मौत की खबरें आ रही है। बताया जा रहा है कि मसूद की मौत लिवर की बीमारी से हुई है। हालांकि अभी तक पाकिस्तान ने इसकी पुष्टि नहीं की है। कुछ मीडिया हाउस इसको पाकिस्‍तान का प्रोपगंडा बता रहे हैं।

पाकिस्तान में हवाई हमले के बाद विदेश मंत्री महमूद कुरैशी ने पिछले गुरुवार को सफाई देते हुए कहा था कि मसूद अजहर बीमार है। और कहा था कि वह इस हद तक अस्वस्थ है कि वह अपना घर नहीं छोड़ सकता, क्योंकि वह वास्तव में अस्वस्थ है।

मसूद अजहर की मौत को लेकर अटकलें

मसूद के बालाकोट हमले में घायल होने से लेकर किडनी खराब होने तक मौत की वजह बताई जा रही है। यह सूचना के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। यह पाकिस्तान की नई चाल हो सकती है। ओसामा बिन लादेन के बारे में भी पाकिस्तान ने झूठ फैलाया था।

जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख अजहर ओसामा बिन लादेन का करीबी रह चुका है, जो कई अफ्रीकी देशों में आतंक का प्रेरक रहा है और कई पाकिस्तानी मौलवियों को ब्रिटेन की मस्जिदों में धार्मिक प्रवचन के जरिए जिहाद के लिए प्रेरित किया। यह जानकारी एक अधिकारी ने दी।

50 वर्षीय प्रभावशाली और मास्टरमाइंड आतंकी का प्रभाव इतना बड़ा था कि जब वह 31 दिसंबर, 1999 को कंधार में अपहृत इंडियन एयरलाइंस के विमान IC-814 को मुक्त करने के बदले में भारत द्वारा रिहा किया गया तो ओसामा बिन लादेन ने उसी रात भोज की मेजबानी की। भोज में लादेन ने याद दिलाया कि 1993 में उन्होंने और अजहर ने पहली बार एक साथ काम किया था।

अजहर को 1994 में जम्मू-कश्मीर में जिहाद का प्रचार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। अजहर की ब्रिटिश भर्तियों में से आतंकी समूह हरकत-उल-अंसार (HuA) के सदस्य के रूप में उमर शेख ने उसकी रिहाई के लिए 1994 में भारत में चार पश्चिमी पर्यटकों का अपहरण कर लिया था। अजहर की रिहाई के लिए 1995 में फिर से पांच पश्चिमी पर्यटकों का अपहरण कर लिया गया और अंततः उन्हें भी मार डाला गया।

अजहर की रिहाई के लगभग तुरंत बाद जैश-ए-मोहम्मद का गठन किया गया और इसने अप्रैल 2000 में जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर में बादामी बाग छावनी पर आत्मघाती हमला किया गया था। 24 वर्षीय आत्मघाती हमलावर आसिफ सादिक था जो अजहर की शुरुआती भर्ती और बर्मिंघम के छात्रों में से एक था।

इस समय अजहर ने कई अल-कायदा के रंगरूटों का उपयोग करना शुरू कर दिया। 1979-1989 में सोवियत-अफगान युद्ध में घायल होने के बाद उसे आतंकी संगठन हरकत-उल-अंसार के प्रेरणा विभाग के प्रमुख के रूप में चुना गया था।

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